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Dhanbad News : राज्यसभा चुनाव में विधायकों की खरीद-फरोख्त की फिराक में भाजपा- राधाकृष्ण किशोर

वित्त मंत्री ने दावा किया कि राज्य में महागठबंधन पूरी तरह मजबूत है. झामुमो, कांग्रेस, राजद व वामदलों को मिलाकर गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है.राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 मतों की आवश्यकता है. ऐसे में महागठबंधन की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है
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मीडिया से बात करते राधाकृष्ण किशोर.

Dhanbad : झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शनिवार को धनबाद में थे. उन्होंने राज्यसभा चुनाव, कांग्रेस संगठन और भाषा नियमावली जैसे अहम राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी. सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने भाजपा पर राज्यसभा चुनाव को लेकर तीखा हमला बोला. आरोप लगाया कि भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश कर रही है.


उन्होंने कहा कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है. इसके बावजूद उम्मीदवार उतारने की तैयारी यह संकेत देती है कि पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बजाय जोड़-तोड़ व खरीद-फरोख्त के सहारे चुनाव जीतना चाहती है.

 

महागठबंधन मजबूत, कांग्रेस उतारेगी उम्मीदवार

 

वित्त मंत्री ने दावा किया कि राज्य में महागठबंधन पूरी तरह मजबूत है. झामुमो, कांग्रेस, राजद व वामदलों को मिलाकर गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है.राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 मतों की आवश्यकता है. ऐसे में महागठबंधन की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है.उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारेगी. हालांकि, अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और आलाकमान के स्तर पर लिया जाएगा.

 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से व्यक्तिगत विवाद नहीं

 

कांग्रेस संगठन में खींचतान और प्रदेश अध्यक्ष के साथ मतभेदों को लेकर उठ रहे सवालों पर राधाकृष्ण किशोर ने अपनी स्थिति स्पष्ट की. कहा कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है. लोकतांत्रिक पार्टी में नीतिगत मतभेद स्वाभाविक हैं. मतभेद यदि हैं भी तो पार्टी की नीतियों और कार्यशैली को लेकर हैं, किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं.

 

भाषा विवाद नहीं, नियमावली में हुई चूक 

 

झारखंड में भाषा नियमावली को लेकर चल रही बहस पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसे विवाद कहना उचित नहीं होगा. उनके अनुसार, यह एक प्रशासनिक चूक है जिसे सरकार सुधारने की दिशा में काम कर रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस विषय पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. समिति की अगली बैठक 3 जून को प्रस्तावित है, जिसमें विभिन्न पक्षों पर विचार किया जाएगा.

 

उन्होंने कहा कि झारखंड के बिहार से सटे कई जिलों में भोजपुरी, मैथिली और अंगिका जैसी भाषाएं बड़ी संख्या में बोली जाती हैं. ऐसे में इन भाषाओं को भी उचित सम्मान और स्थान मिलना चाहिए. जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और सम्मान पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन जिन क्षेत्रों में जनजातीय भाषाएं प्रचलित नहीं हैं, जहां उन भाषाओं की पढ़ाई नहीं होती और न ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं वहां उन्हें अनिवार्य रूप से लागू करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता.किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए. उन्होंने सरकार से भाषा नियमावली में संशोधन की मांग की. 

 


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