Dhanbad : भीषण गर्मी के बीच आम लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में प्याऊ की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. इसका मकसद सरकारी कामकाज के लिए आने वाले लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था. लेकिन जिले के कई सरकारी कार्यालयों में यह व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है.

मिश्रित भवन समेत कई सरकारी कार्यालयों में प्याऊ तो लगाए गए हैं. घड़ों के साथ मुख्यमंत्री की तस्वीरें भी लगाई गई हैं. लेकिन अधिकांश घड़े खाली पड़े हैं. ऐसे में पानी की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है.
एगारकुंड प्रखंड कार्यालय और धनबाद मिश्रित भवन सहित कई सरकारी परिसरों में लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है. भीषण गर्मी में दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को बुनियादी सुविधा के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ रही है. लोगों का कहना है कि सरकार की मंशा सराहनीय है लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण इसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है.
इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि सुबह घड़ों में पानी भर दिया जाता है लेकिन दिनभर उपयोग होने के कारण पानी खत्म हो जाता है. हालांकि सवाल यह है कि पानी खत्म होने के बाद घड़ों को दोबारा भरने की जिम्मेदारी किसकी है. यदि दिनभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जाती तो प्याऊ लगाने का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है.
गर्मी के मौसम में पेयजल जैसी आवश्यक सुविधा का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. मुख्यमंत्री के निर्देशों का वास्तविक उद्देश्य लोगों को राहत पहुंचाना है लेकिन कई कार्यालयों में यह व्यवस्था केवल तस्वीरों और दिखावे तक सीमित नजर आ रही है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्याऊ की नियमित निगरानी की जाए और दिनभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि सरकार की जनहितकारी योजना का लाभ वास्तव में आम लोगों तक पहुंच सके.
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