- आईआईटी-आईएसएम में क्लीन एयर पर संवाद में उभरे विचार
- कोयला खनन के साथ स्वच्छ हवा, स्वस्थ जीवन भी जरूरीः डीसी
Dhanbad News : धनबाद कोयलांचल में खनन और वायु प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने पर विचार के लिए आईआईटी-आईएसएम में शुक्रवार को क्लीन एयर संवाद 2026 का आयोजन हुआ. समारोह में विशेषज्ञों ने बंद खदानों के वैकल्पिक उपयोग और तकनीकी समाधानों पर मंथन किया. बंद भूमिगत खदानों के पानी से भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन और गहरी ओपन-कास्ट खदानों को कृत्रिम झीलों में बदलने जैसे विकल्प सुझाए. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं.
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धनबाद डीसी आदित्य रंजन ने कहा कि कोयला खनन के साथ स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन भी जरूरी है. उन्होंने उपर्युक्त संभावनाओं पर काम करने की जरूरत बताई.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम) और असर सोशल इंपैक्ट एडवाइजर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संवाद में जिला प्रशासन, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों, खनन क्षेत्र, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इस दौरान खनन प्रभावित क्षेत्रों में वायु प्रदूषण, जनस्वास्थ्य, पर्यावरणीय चुनौतियों और टिकाऊ आजीविका के विकल्पों पर चर्चा हुई.
रिपोर्ट में सामने आईं खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याएं
कार्यक्रम में टुवर्ड्स सस्टेनेबल माइनिंग एंड हेल्थियर लाइव्स इन धनबाद रिपोर्ट का विमोचन किया गया. रिपोर्ट में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के अनुभवों, वायु प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों और स्थानीय विकास की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है. डीसी ने कहा कि धनबाद में कोयला खदानों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों की निकटता के कारण वायु प्रदूषण की चुनौती गंभीर है. उन्होंने यूरोप के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि बंद खदानों का वैज्ञानिक तरीके से पुनरुद्धार और वैकल्पिक उपयोग पर्यावरण सुधार के साथ रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा कर सकता है.
उन्होंने शोधकर्ताओं और तकनीकी संस्थानों से ऐसे शोध पर ध्यान देने की अपील की जिन्हें धरातल पर लागू किया जा सके. ओवरबर्डन (ओबी) डंप से उड़ने वाली धूल और काली राख पर नियंत्रण के साथ प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर सड़क निर्माण जैसे विकल्पों पर भी विचार करने का सुझाव दिया.
उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में जमीन धंसने, वायु एवं जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए अगली पीढ़ी के लिए कोयले से इतर रोजगार के अवसर विकसित करना आवश्यक है. इसके साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा पैदल चलने और साइकिल चलाने के अनुकूल बुनियादी ढांचा विकसित करने पर भी जोर दिया.
कार्यक्रम में खनन प्रभावित क्षेत्रों में सहभागी दृष्टिकोण को मजबूत करने पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया. इसका संचालन शशिधर झा ने किया. सत्र में पर्यावरण समिति के प्रतिनिधि भोलनाथ राम, हृदय रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व उप अधीक्षक डॉ. सुनील सिन्हा और ज्ञान विज्ञान समिति के रवि सिंह ने पर्यावरणीय अनुपालन, धूल नियंत्रण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विचार रखे.
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