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Dhanbad News: क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता के लिए IIT-ISM में जुटे भारतीय वैज्ञानिक

Dhanbad News: सम्मेलन के शुभारंभ के मौके पर मुख्य अतिथि सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, हैदराबाद के पूर्व निदेशक प्रो. जे. एस. यादव ने कहा कि भारत में रेयर अर्थ के पर्याप्त भंडार होने के बावजूद देश को अपनी जरूरतों के लिए खासकर चीन से आयात पर निर्भर रहना पड़ता है.
 
आईसीसी का 45वां राष्ट्रीय सम्मेलन

Dhanbad News: रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करना और शोध को औद्योगिक जरूरतों से जोड़ना जरूरी है. इसी उद्देश्य से शुक्रवार को आईआईटी-आईएसएम के पेनमैन ऑडिटोरियम में इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स (आईसीसी) के 45वें राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई.

 

30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ पर विशेष सिम्पोजियम भी आयोजित किया जा रहा है. यह आयोजन संस्थान के शताब्दी वर्ष समारोह का हिस्सा है.

 

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स्वदेशी तकनीक जरूरी

सम्मेलन के शुभारंभ के मौके पर मुख्य अतिथि सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, हैदराबाद के पूर्व निदेशक प्रो. जे. एस. यादव ने कहा कि भारत में रेयर अर्थ के पर्याप्त भंडार होने के बावजूद देश को अपनी जरूरतों के लिए खासकर चीन से आयात पर निर्भर रहना पड़ता है. 


उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स के प्रोसेसिंग के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर जोर दिया. साथ ही कहा कि वैज्ञानिकों को ऐसे शोध करने चाहिए, जिनका लाभ उद्योग और समाज तक पहुंचे. खनन, औद्योगिक अपशिष्ट और रेडियोएक्टिव कचरे से जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजना भी जरूरी है.

 

विशिष्ट अतिथि जेएनसीएएसआर, बेंगलुरु की मानद प्रोफेसर प्रो. हिरियाक्कनवर इला ने युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को उचित मार्गदर्शन देने पर जोर दिया. उन्होंने सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मटेरियल जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता बताई.

20 करोड़ के शोध प्रोजेक्ट संचालित

आईआईटी आईएसएम के एक्टिंग डायरेक्टर प्रो. सरत कुमार दास ने संस्थान की 100 वर्षों की शैक्षणिक और शोध विरासत का उल्लेख किया. डीन प्रो. केका ओझा ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ देश की आर्थिक प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं. इनके विकास में रसायन विज्ञानियों की भूमिका निर्णायक होगी.

 

केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. सागर पाल ने बताया कि विभाग में सरकारी और औद्योगिक वित्तपोषण से करीब 20 करोड़ रुपये के शोध प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं.

 

सम्मेलन में एनालिटिकल एंड एनवायरनमेंटल, इनऑर्गेनिक, ऑर्गेनिक और फिजिकल केमिस्ट्री की चार प्रमुख शाखाओं पर व्याख्यान, शोध प्रस्तुतियां और पोस्टर सत्र आयोजित होंगे. समानांतर सिम्पोजियम में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ के अन्वेषण, निष्कर्षण, प्रसंस्करण तथा टिकाऊ उपयोग पर चर्चा की जाएगी.

 

उद्घाटन समारोह के अवसर पर कॉन्फ्रेंस एब्स्ट्रैक्ट बुक का विमोचन, अतिथियों का सम्मान और पुरस्कार वितरण किया गया. साथ ही इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स के संस्थापक रहे, दिवंगत डॉ. जी. सी. सक्सेना को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. 

 

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