Dhanbad : धनबाद जिला परिषद की जमीन कांग्रेस कार्यालय के लिए दिए जाने के प्रस्ताव पर राजनीति गरमा गई है. गिरिडीह सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी के बयान के बाद जिला परिषद सदस्यों ने पलटवार किया है. जिला परिषद सभागार में बुधवार को प्रेसवार्ता कर सदस्यों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है. कहा कि बोर्ड के सामूहिक निर्णय पर सवाल उठाना गलत परंपरा को बढ़ावा देना है.
जिप सदस्य विकास महतो व इसराफिल ने कहा कि जिला परिषद उपाध्यक्ष के सरकारी आवास में बैठकर राजनीतिक बयानबाजी करना असंवैधानिक और मर्यादा के खिलाफ है. यदि किसी सदस्य या पदाधिकारी को बोर्ड के किसी निर्णय पर आपत्ति थी, तो बोर्ड की बैठक में ही विरोध दर्ज कराना चाहिए था, न कि मीडिया के माध्यम से राजनीतिक बयान देना चाहिए.
उन्होंने कांग्रेस भवन मामले में कहा कि वर्ष 2014 में ही इससे संबंधित केस जिला परिषद जीत चुकी है. उस समय कार्यपालक पदाधिकारी ने पत्र निर्गत किया था, जिसमें आश्वासन दिया गया था कि जमीन अतिक्रमण मुक्त कर जिला परिषद को सौंपी जाएगी. लेकिन आज तक जमीन पूरी तरह हस्तांतरित नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि जब जिला परिषद को उक्त जमीन मिलने पर पहले से पारित प्रस्ताव के अनुसार वहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स न मॉल का निर्माण किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद प्रतिनिधि द्वारा मनमाने तरीके से बयान देकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि इस संबंध में वैसी कोई बात नहीं है जैसा प्रचारित किया जा रहा है.
जिला परिषद बोर्ड में सभी सदस्यों की सहमति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव पारित किया गया है. ऐसे में सार्वजनिक मंच से उस फैसले पर सवाल उठाना बोर्ड की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है. यदि जिप उपाध्यक्ष सरिता देवी को इस प्रस्ताव पर किसी प्रकार की आपत्ति थी तो उन्हें बैठक के दौरान ही विरोध दर्ज कराना चाहिए था. बाद में जिप उपाध्यक्ष के पति व सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बयान देना पूरी तरह अनुचित है.
प्रेसवार्ता में मौजूद सदस्यों ने आरोप लगाया कि बोर्ड के फैसले को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला परिषद का हर निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया और बोर्ड की सहमति से लिया जाता है. इसलिए सभी जनप्रतिनिधियों को उसका सम्मान करना चाहिए.जिप सदस्यों ने यह भी कहा कि विकास कार्यों और संस्थागत फैसलों को राजनीति से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए. अनावश्यक बयानबाजी से जनता के बीच गलत संदेश जाता है और जिला परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं.
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