- सूचना देने के बाद भी बीसीसीएल और संबंधित अधिकारी स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचे
Dhanbad : जिले के बाघमारा प्रखंड अंतर्गत सोनारडीह ओपी क्षेत्र के टंडावाड़ी स्थित कर्मकार टोला में फिर भू-धंसान हुई है. देर रात अचानक जमीन धंसने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. घटना के बाद लोग पूरी रात जागे रहे और अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए.
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इलाका लंबे समय से कोयला खनन से प्रभावित रहा है और यहां समय-समय पर भू-धंसान की घटनाएं होती रही हैं. बावजूद इसके अब तक समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के नीचे लगातार हो रही हलचल और धंसान की घटनाओं ने उनके सामने जान-माल का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है.

घटना के बाद प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने बताया कि अचानक जमीन धंसने की आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए. इसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना की सूचना बीसीसीएल और संबंधित अधिकारियों को दी गई है. इसके बावजूद अब तक कोई अधिकारी मौके पर स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचे हैं. इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. उनका कहना है कि हर बार घटना के बाद केवल आश्वासन मिलता है. लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता.

कर्मकार टोला के निवासियों ने कहा कि वे वर्षों से भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं. बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है. कई परिवारों को हर समय इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं उनका घर अचानक जमीन में न समा जाए.
ग्रामीणों ने प्रशासन और बीसीसीएल से मांग की है कि प्रभावित परिवारों का सर्वे कर उन्हें अविलंब सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए. उनका कहना है कि जब तक स्थायी पुनर्वास नहीं होगा तब तक इस तरह की घटनाएं लोगों के लिए जानलेवा खतरा बनी रहेंगी.
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भू-धंसान के कारण किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति का नुकसान होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बीसीसीएल और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी.
फिलहाल पूरे कर्मकार टोला में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासन व बीसीसीएल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित पुनर्वास और स्थायी समाधान चाहिए, ताकि वे अपने परिवार के साथ बिना किसी डर के जीवन जी सकें.
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