- गरीबों का दस्तावेज बना साइबर ठगों का हथियार
- एक ही व्यक्ति के नाम पर 20 तक सिम तक जारी
- 57 मोबाइल नंबर ठगी से जुड़े मिले
Dhanbad: कुछ रुपये के लालच में ग्रामीणों से उनके दस्तावेज लेकर सिम और बैंक खाते खुलवाने वाले गिरोह का धनबाद पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस के मुताबिक बलियापुर थाना क्षेत्र में ग्रामीणों के नाम पर करीब 166 सिम कार्ड जारी कराए गए, जिनमें से 57 सिम नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर साइबर अपराध से जुड़े पाए गए. मामले में एक नाबालिग समेत छह लोगों को हिरासत में लिया गया है.

सिम और बैंक खाते खुलवाने वाले गिरोह का पर्दाफाश
ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने शनिवार को बताया कि दूरसंचार विभाग के TAFCOP पोर्टल पर बलियापुर क्षेत्र की एक मोबाइल दुकान की गतिविधियों के विश्लेषण के दौरान संदिग्ध पैटर्न सामने आया था. इसके बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सिंदरी के नेतृत्व में छापेमारी की गई.ट
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एक ही नाम पर 11 से 20 मोबाइल सिम तक जारी
जांच में पुलिस को पता चला कि दुकान की POS मशीन का कथित दुरुपयोग कर शीतलपुर और आसपास के गांवों के ग्रामीणों के नाम पर बड़ी संख्या में सिम जारी किए जा रहे थे. एक ही व्यक्ति के नाम पर बेहद कम समय में 11, 14, 15 और यहां तक कि 20 सिम तक जारी किए गए.
उन्होंने बताया गिरोह के सदस्य ग्रामीणों को पैसे या कमीशन का लालच देकर दुकान तक लाते थे. उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सिम जारी करवाए जाते थे और बाद में इन सिम को साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था.
सिम के साथ बैंक खाते भी खुलवाता था गिरोह
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि ग्रामीणों के नाम पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एयरटेल पेमेंट्स बैंक और पेटीएम पेमेंट्स बैंक में खाते खुलवाए गए. इन खातों में सिम लिंक कर पासबुक, एटीएम कार्ड और खाते-सिम का एक्सेस साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने का आरोप है.
NCRP पर सिम की जांच के दौरान देशभर में दर्ज साइबर ठगी से जुड़ी कई शिकायतों के एक्नॉलेजमेंट नंबर मिले. ग्रामीण एसपी ने बताया कि अब तक की जांच में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के तार इस नेटवर्क से जुड़ने की बात सामने आई है. पुलिस इन सिम और खातों के जरिए हुई ठगी की पूरी कुंडली खंगाल रही है.
दुकान संचालक समेत छह हिरासत में
पुलिस ने संबंधित मोबाइल दुकान के संचालक और एक सेल्समैन को पकड़ा है. पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया है. मामले में कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है.
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि ग्रामीणों के नाम पर जारी किए गए सिम और खोले गए बैंक खाते किन-किन साइबर अपराधियों तक पहुंचे और इनके जरिए देशभर में कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया.
पुलिस की सख्त चेतावनी—लालच में न दें सिम और बैंक खाता
ग्रामीण एसपी ने आम लोगों से अपील की कि किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से सिम जारी न कराएं और बैंक खाता इस्तेमाल के लिए किसी को न दें. उन्होंने कहा कि आपके नाम से जारी सिम या बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध में हुआ तो आप भी कानूनी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं.
ग्रामीण एसपी ने लोगों से कहा कि कुछ रुपये या कमीशन की लालच में अपने दस्तावेज, सिम या बैंक खाते किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं. साइबर अपराधियों का माध्यम बनना भारी पड़ सकता है और जेल तक की नौबत आ सकती है.
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