Dhanbad News : धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड की बैंगनरिया पंचायत के झगरू जमुनिया कोचा गांव के आदिवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. यहां की 500 लोगों की आबादी डांडी-चुआं के पानी से अपनी प्यास बुझा रही है. गांव विकास की मुख्यधारा से इस कदर कटा हुआ है कि यहां न तो पक्की सड़क है, न पीने का साफ पानी और न ही स्वास्थ्य सुविधा.
गांव में पीने के पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है. ग्रामीण डांडी-चुआं के पानी पर निर्भर हैं.गर्मी के दिनों में यह स्रोत भी सूखने लगता है, जिससे घंटों पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है. गांव की दो छोटे जलमीनारें केवल शो-पीस बनकर रह गई हैं. वहीं, एक बड़ी जलमीनार अधूरी है, जो प्रशासन की उदासीनता को बयां करता है.
गांव तक पहुंचने वाली करीब 2 किलोमीटर सड़क अत्यंत जर्जर है. बरसात के दिनों में यह कीचड़ में तब्दील हो जाती है. जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है. गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण एंबुलेंस या पुलिस को बुलाना भी नामुमकिन है. किसी के बीमार होने या प्रसव पीड़ा के समय मरीज को खाट पर लिटाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है. इस गांव की बदहाली का असर अब सामाजिक जीवन पर भी दिखने लगा है.
मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण लोग इस गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से भी कतराने लगे हैं. रोजगार और शिक्षा के लिए भी युवाओं को संघर्ष करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि धनबाद के शहरी इलाके भले ही कितने आगे बढ़ गए हों, लेकिन हमारे गांव में आज तक विकास की कोई किरण नहीं पहुंची है.

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