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Dhanbad News : मॉल से लेकर सरकारी भवनों में फायर सेफ्टी पर सवाल, लगे हैं एक्सपायरी एक्सटिंग्विशर

धनबाद का सिटी सेंटर.

सिटी सेंटर और कंबाइंड बिल्डिंग में सामने आई लापरवाही

Dhanbad : दिल्ली के होटल व बिहार के मुजफ्फरपुर में अस्पताल अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इसके बाद भी धनबाद कोयलांचल की स्थिति बेहद चिंताजनक है. धनबाद के प्रमुख व्यावसायिक परिसरों व सरकारी भवनों में अग्नि सुरक्षा के उपायों की  पड़ताल में गंभीर खामियां सामने आई हैं. भवनों में कई ऐसे फायर एक्सटिंग्विशर मिले जो एक्सपायर हो चुके हैं. जबकि कई उपकरणों की वर्षों से रिफिलिंग व सर्विसिंग नहीं हुई है.

 

धनबाद का सिटी सेंटर शहर के व्यस्त व्यावसायिक परिसरों में शामिल है. यहां मॉल, रेस्टोरेंट, शोरूम व विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ ऊपरी मंजिलों में रिहायशी फ्लैट भी हैं. परिसर में कई शिक्षण संस्थान व चिकित्सा सेवाएं भी संचालित होती हैं, जहां प्रतिदिन हजारों लोग आते-जाते हैं.
पड़ताल में परिसर में लगाए गए कई फायर एक्सटिंग्विशरों पर दर्ज तिथियां चौंकाने वाली हैं. कई उपकरणों की रिफिलिंग अवधि दो से ढाई वर्ष पहले ही समाप्त हो चुकी है, जबकि कुछ उपकरणों की लंबे समय से सर्विसिंग नहीं हुई है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपकरण आपातकालीन स्थिति में अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर पाते. 


सरकारी भवन भी नहीं हैं सुरक्षित

 

धनबाद के मिश्रित भवन (कंबाइंड बिल्डिंग) में बिजली, खनन, शिक्षा व अन्य महत्वपूर्ण विभागों के कार्यालय हैं. वहां भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में दिखाई दी. भवन में लगाए गए कई फायर एक्सटिंग्विशरों की अंतिम रिफिलिंग वर्ष 2021 में हुई थी. इसके बाद दोबारा सर्विसिंग या रखरखाव का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला. ऐसे में यह आशंका स्वाभाविक है कि वर्षों पुराने उपकरण किसी आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से काम कर पाएंगे या नहीं. मिश्रित भवन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आम लोग सरकारी कार्यों के लिए पहुंचते हैं. ऐसे महत्वपूर्ण भवन में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपेक्षा गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय बन सकती है.

 

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

 

अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, फायर एक्सटिंग्विशर केवल लगाने भर से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती. इनकी नियमित जांच, समय पर रिफिलिंग व तकनीकी परीक्षण अनिवार्य है. यदि उपकरणों का समय पर रखरखाव नहीं किया जाए तो आग लगने की स्थिति में वे निष्क्रिय साबित हो सकते हैं.

 

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भवन में लगे अग्निशामक सिलिंडर की रिफिलिंग डेट फेल  

 

धनबाद अग्निशमन विभाग के प्रभारी लक्ष्मण प्रसाद ने भी स्वीकार किया कि फायर एक्सटिंग्विशरों की नियमित जांच और समय-समय पर रिफिलिंग आवश्यक है. उन्होंने कहा कि एक वर्ष से अधिक समय तक सर्विसिंग नहीं होने पर उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में जोखिम कई गुना बढ़ सकता है.

 

फायर सेफ्टी ऑडिट पर भी सवाल

 

शहर के प्रमुख व्यावसायिक व सरकारी परिसरों में इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
क्या इन भवनों का नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट किया जा रहा है? यदि ऑडिट होता है तो एक्सपायरी उपकरणों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? और हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?

 

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना अधिक आवश्यक है. शहर के सभी मॉल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी भवनों में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराए जाने की जरूरत है ताकि निष्क्रिय और एक्सपायरी उपकरणों को तत्काल बदला जा सके.

 


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