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Dhanbad News: भूली में करोड़ों की जमीन पर घमासान, BTA ने ढहाई बाउंड्रीवॉल, कई दावेदार आमने-सामने

धनबाद के भूली स्थित पंचवटी नगर में करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है. काली मंदिर के समीप स्थित इस जमीन पर बीसीसीएल, स्थानीय ग्रामीण और एक निजी दावेदार शुभम वर्मा अपना-अपना दावा कर रहे हैं.
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Dhanbad: धनबाद के भूली स्थित पंचवटी नगर में करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है. काली मंदिर के समीप स्थित इस जमीन पर बीसीसीएल, स्थानीय ग्रामीण और एक निजी दावेदार शुभम वर्मा अपना-अपना दावा कर रहे हैं. पिछले करीब 15 दिनों से जमीन पर नींव की खुदाई, प्लॉटिंग और घेराबंदी का कार्य चल रहा था.

 

मामले की जानकारी मिलने के बाद भूली टाउनशिप एडमिनिस्ट्रेशन (बीटीए) ने कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन बाउंड्रीवॉल को ध्वस्त कर दिया. शनिवार को बीटीए के एचआर मैनेजर नीरज कुमार, राजस्व निरीक्षक परशुराम चौहान और सहायक राजस्व निरीक्षक अशरफ हुसैन अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे. टीम ने निर्माणाधीन बाउंड्रीवॉल हटाने के साथ ही पूरे मामले की सूचना भूली ओपी को देते हुए लिखित शिकायत भी दर्ज कराई.

 

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बीटीए अधिकारियों के अनुसार अंचल अधिकारी (सीओ) के निर्देश पर पूर्व में जमीन की मापी कराई गई थी और उसकी सीमा चूना डालकर चिन्हित की गई थी. इसके बावजूद संबंधित जमीन पर कथित रूप से अवैध निर्माण और घेराबंदी का कार्य जारी रहा, जिसके बाद कार्रवाई की गई. 


इधर स्थानीय ग्रामीणों ने भी एलआरडीसी और अंचल अधिकारी को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि मौजा संख्या-1, खाता संख्या-109 और प्लॉट संख्या-2675 की लगभग 45 डिसमिल जमीन को फर्जी खतियान और कथित नकली दस्तावेजों के आधार पर बेचने का प्रयास किया जा रहा है.

 

स्थानीय निवासी सरोजा देवी ने बताया कि वह पिछले लगभग 30 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रही हैं. उनके अनुसार यह जमीन लंबे समय से आम रास्ते और बच्चों के खेल मैदान के रूप में उपयोग होती रही है. ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

 

वहीं जमीन पर घेराबंदी करा रहे शुभम वर्मा ने सभी आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि यह जमीन उनके परिवार ने करीब 30 वर्ष पहले विधिवत खरीदी थी और स्वामित्व से संबंधित सभी वैध दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर विवाद उत्पन्न कर रहे हैं.

 

बताया जा रहा है कि इस जमीन पर पूर्व में नगर निगम और वन विभाग द्वारा बड़ी संख्या में पौधारोपण भी कराया गया था जिसे बाद में धीरे-धीरे हटा दिया गया. अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन पर सभी की नजरें टिकी हैं. जांच के बाद स्पष्ट होगा, विवादित जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है.

 

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