Dhanbad News : झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले डुमरी विधायक जयराम महतो अब पीएचडीधारी विधायक भी बन गए हैं. उन्होंने शनिवार को बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU), धनबाद के अंग्रेजी विभाग से पीएचडी की अंतिम वाइवा-वोसे प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रमाणपत्र प्राप्त किया. इस मौके पर उनकी मां, परिजन, शिक्षक और अन्य लोग मौजूद रहे.
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जयराम महतो के शोध का विषय था From Colonial to Post-Colonial: A Study of the Complexities of Victimization of Marginalized People in the Selected Novels of Mulk Raj Anand and Ngugi wa Thiong’o’. उन्होंने अंग्रेजी विभाग के शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपना शोध पूरा किया.
पीएचडी पूरी करने के बाद जयराम महतो ने अपने संघर्ष भरे जीवन के कई पहलुओं को साझा किया. बताया कि बचपन में ही पिता का निधन हो गया था. इसके बाद करीब 13-14 साल तक मामा के घर रहकर पढ़ाई की. अभाव और संघर्ष के बावजूद शिक्षा के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ. इसी संघर्ष के बीच वह शिक्षक बने और वर्ष 2024 में जनता के प्रतिनिधि के रूप में विधायक चुने गए.
अपने बचपन की परिस्थितियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पिता को बचपन में खो देने के कारण उन्हें टूअर कहकर संबोधित किया जाता था. उन्होंने कहा कि परिवार से सीख मिली थी कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, कोई गलत काम नहीं करना है.
जयराम महतो ने कहा कि आज वह जनता के प्रतिनिधि हैं इसलिए जनता ही उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है. अगर वह अधिकारी बने होते, तो शायद पहले अपने बारे में सोचते. लेकिन विधायक होने के नाते समाज और जनता के हित में जो भी करना पड़ेगा, वह पीछे नहीं हटेंगे. उनका उद्देश्य समाज को शिक्षित करना और आगे बढ़ाना है.
उन्होंने BBMKU की सीनेट में सदस्य नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जताई. कहा कि विश्वविद्यालय की गतिविधियों और व्यवस्था से वह अच्छी तरह परिचित हैं. बावजूद इसके यहां भी उन्हें राजनीति का शिकार होना पड़ा.
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