Dhanbad : आईआईटी (आईएसएम} के भौतिकी विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नेशनल सिम्पोजियम ऑन इंटेंस लेजर मैटर इंटरैक्शंस (ILMI-2026) का गुरुवार को शुभारंभ हुआ.देशभर से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की मौजूदगी में शुरू हुई इस संगोष्ठी में लेजर विज्ञान, प्लाज्मा फिजिक्स, अल्ट्राफास्ट टेक्नोलॉजी और अत्याधुनिक अनुसंधान पर विचार-विमर्श किया जाएगा.
संगोष्ठी के दौरान हाई टू अल्ट्रा हाई इंटेंसिटी लेजर-मैटर इंटरैक्शंस, लेजर ड्रिवेन प्लाज्मा साइंस एंड एप्लीकेशंस, अल्ट्राफास्ट ऑप्टिक्स, अल्ट्राफास्ट मैग्नेटाइजेशन डायनेमिक्स, थ्योरिटिकल व कम्प्यूटेशनल प्लाज्मा फिजिक्स, हाई हार्मोनिक जेनरेशन (एचएचजी), टेराहर्ट्ज़ साइंस, स्पिन्ट्रॉनिक्स, लेजर डायग्नोस्टिक्स, एडवांस्ड प्लाज्मा डायग्नोस्टिक्स तथा लेजर आधारित मैटेरियल प्रोसेसिंग जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे.
इसके साथ ही भारत में हाई इंटेंसिटी लेजर सुविधाओं और अत्याधुनिक प्रयोगात्मक क्षमताओं के विकास पर भी विचार-विमर्श होगा.मुख्य अतिथि टीआईएफआर मुंबई के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर प्रो. जी. रविंद्र कुमार ने कहा कि भारत के वैज्ञानिक भविष्य की मजबूत नींव बुनियादी अनुसंधान से ही तैयार होगी.वहीं आईआईटी (आईएसएम) के उप निदेशक प्रो. शरत कुमार दास ने कहा कि ऐसी संगोष्ठियां नए विचारों, नवाचार और सहयोगी अनुसंधान को बढ़ावा देती हैं.
डीन (आरएंडडी) प्रो.पार्थसारथी दास ने कहा कि लेजर और क्वांटम विज्ञान में हो रहे शोध ऊर्जा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और अन्य राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.संगोष्ठी के संयोजक प्रो.अमितावा अदक ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य लेजर व प्लाज्मा विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों को साझा मंच उपलब्ध कराना है.सह-संयोजक प्रो. ऋत्विक मंडल के अनुसार तीन दिनों में आठ तकनीकी सत्र, प्लेनरी एवं कीनोट व्याख्यान, छात्र प्रस्तुतियां और उद्योग सत्र आयोजित किए जाएंगे जिससे वैज्ञानिक सहयोग और शोध को नई दिशा मिलेगी.
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