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धनबाद रिंग रोड मुआवजा घोटाला : एसीबी कोर्ट से जमानत रद्द किए जाने के आदेश को HC ने किया निरस्त

Ranchi: धनबाद रिंग रोड भूमि के अधिग्रहण मुआवजा में तथाकथित घोटाले के 18 आरोपियों की जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश कुमार की कोर्ट ने पाया कि यह मामला एससी/ एसटी एक्ट से जुड़ा है, इसलिए इसकी सुनवाई एससी/ एसटी से संबंधित कोर्ट में होनी चाहिए थी.
 
कोर्ट-कचहरी की खबरें
  • कोर्ट ने कहा- एससी / एसटी से संबंधित कोर्ट में होनी चाहिए थी सुनवाई
  • आरोपियों की जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने किया निष्पादित

Ranchi: धनबाद रिंग रोड भूमि के अधिग्रहण मुआवजा में तथाकथित घोटाले के 18 आरोपियों की जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश कुमार की कोर्ट ने पाया कि यह मामला एससी/ एसटी एक्ट से जुड़ा है, इसलिए इसकी सुनवाई एससी/ एसटी से संबंधित कोर्ट में होनी चाहिए थी.  

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कोर्ट ने धनबाद की एसीबी कोर्ट द्वारा प्रार्थियों की जमानत याचिका खारिज किये जाने के आदेश को रद्द कर दिया. साथ ही मामले से संबंधित सुनवाई एससी/ एसटी से संबंधित कोर्ट में चलने की बात कही. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने पक्ष रखा.
 

एसीबी के विशेष लोक अभियोजक विनीत वशिष्ठ एवं नेहाला शरमीन ने भी कोर्ट को बताया था कि यह मामला एसटी/एससी से है इसलिए इसकी सुनवाई एसीबी कोर्ट की बजाय एससी/ एसटी से संबंधित कोर्ट में सुनी जानी चाहिए थी.
 

दरअसल, मामले में विशाल कुमार सहित 18 आरोपियों ने हाईकोर्ट से जमानत की गुहार लगाई थी. उन्होंने एसीबी कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज कर दिए जाने को चुनौती दी थी. जमानत याचिका दाखिल करने वालों में सुशील प्रसाद, विशाल कुमार, अशोक कुमार महथा, कुमारी रत्नाकर, दिलीप गोप, बापी राय चौधरी, सुमेश्वर शर्मा, शंकर प्रसाद दुबे, अनिल कुमार, नीलम सिन्हा, हर्ष कुमार, उमेश महतो, उदय कांत पाठक, राम कृपाल गोस्वामी, रविंद्र कुमार, आलोक बरियार, काली प्रसाद सिंह, अनुपम कुमारी शामिल हैं.

 

आरोप है कि असली रैयतों की बजाए दूसरे व्यक्तियों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर करोड़ों रुपये के भूमि मुआवजे की राशि का भुगतान कर दिया गया था. यह सब भू-माफिया, तत्कालीन अंचल अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया था. 9 जनवरी को आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी. मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) धनबाद कर रही है.

 

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