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Dhanbad : हल्की बारिश में धंसी ट्रैक किनारे की मिट्टी, हादसे को दे रही न्योता

Dhanbad : धनबाद-गया रेलखंड के तेतुलमारी और निचितपुर स्टेशन के बीच रेल लाइन विस्तारीकरण परियोजना के तहत कतरी नदी पर निर्माणाधीन रेलवे पुल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है. पुल निर्माण के दौरान रेलवे ट्रैक के बेहद करीब की गई मिट्टी कटाई ने पूरे रेल खंड की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
 
  • निर्माण कार्य रोका गया ,गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

Dhanbad : धनबाद-गया रेलखंड के तेतुलमारी और निचितपुर स्टेशन के बीच रेल लाइन विस्तारीकरण परियोजना के तहत कतरी नदी पर निर्माणाधीन रेलवे पुल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है. पुल निर्माण के दौरान रेलवे ट्रैक के बेहद करीब की गई मिट्टी कटाई ने पूरे रेल खंड की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

 

हालात ऐसे बन गए हैं कि मामूली बारिश के बाद ही ट्रैक के किनारे मिट्टी धंसने लगी जिससे संभावित रेल दुर्घटना की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. जानकारी के अनुसार रेल लाइन विस्तारीकरण परियोजना के तहत कतरी नदी पर नए रेलवे पुल का निर्माण किया जा रहा है.

 

इस परियोजना का ठेका लगभग 186.77 करोड़ रुपये की लागत से रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को दिया गया है जबकि निर्माण कार्य का निष्पादन पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से एएनपीआर कंपनी द्वारा कराया जा रहा है.

 

हल्की बारिश में खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल

पुल निर्माण के लिए रेलवे ट्रैक के नीचे और आसपास बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई की गई थी. सुरक्षा के नाम पर ट्रैक के किनारे लोहे की प्लेटें लगाई गईं और मिट्टी को रोकने के लिए बालू भरी बोरियां रखी गई थीं. लेकिन बीते शुक्रवार को हुई हल्की बारिश के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई.

 

ट्रैक के किनारे की मिट्टी खिसकने लगी लोहे की प्लेटें नीचे सरक गईं और बोरियां भी अपनी जगह से हट गईं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि थोड़ी अधिक बारिश होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी. रेलवे ट्रैक के इतने करीब की गई खुदाई से रेल परिचालन की सुरक्षा पर सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है.

 

निर्माण कार्य रोककर गड्ढे भरने में जुटी कंपनी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्माण एजेंसी ने तत्काल खुदाई कार्य रोक दिया और पुल निर्माण के लिए बनाए गए गड्ढों को दोबारा मिट्टी से भरने का काम शुरू कर दिया. हालांकि इसके बावजूद ट्रैक के समीप कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिट्टी का उचित सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया तो भविष्य में और अधिक धंसान हो सकता है. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जल्दबाजी में गड्ढों को भरने के दौरान लोहे की प्लेटें और पाइप तक मिट्टी में दबा दिए गए. हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.

 

नदी पर अस्थायी पुल निर्माण को लेकर भी विवाद

निर्माण कार्य से जुड़ा एक और विवाद सामने आया है. एएनपीआर कंपनी पर कतरी नदी के ऊपर बिना अनुमति अस्थायी पुल निर्माण करने का आरोप लगाया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल मुख्य रूप से कंपनी के भारी वाहनों और मशीनों की आवाजाही के लिए बनाया गया है.

 

कंपनी ने दी सफाई

मामले पर एएनपीआर कंपनी के प्रबंधक रजनीकांत तिवारी ने कहा कि अस्थायी पुल का निर्माण स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर किया गया है ताकि उन्हें आवागमन में सुविधा मिल सके. हालांकि ग्रामीणों का एक वर्ग इस दावे से सहमत नहीं है और उनका कहना है कि पुल का उपयोग मुख्य रूप से कंपनी के निर्माण कार्य और वाहनों की आवाजाही के लिए किया जा रहा है.

 

डीआरएम ने टिप्पणी से किया इनकार

इस पूरे मामले पर जब धनबाद रेल मंडल के डीआरएम अखिलेश मिश्रा से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने ऑन रिकॉर्ड कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. डीआरएम की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आने से भी कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं.

 

गौरतलब है कि 29 मई 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नगर विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा बैठक में नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण और अतिक्रमण को तत्काल रोकने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. ऐसे में नदी पर बनाए गए अस्थायी पुल को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

 

बड़ा सवाल- क्या हादसे का इंतजार?

रेलवे ट्रैक के बिल्कुल किनारे की गई मिट्टी कटाई, बारिश के बाद सामने आई धंसान की स्थिति और सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे सवालों ने परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

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