Dhanbad : देश के प्रमुख शोध संस्थानों में शामिल धनबाद स्थित केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सिंफर) के वैज्ञानिकों ने विज्ञान, कौशल विकास व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में छात्रों के लिए एक नई दिशा तय की है. इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगारोन्मुख व पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना है.
इस कार्यक्रम के तहत बीबीएमकेयू के जियोलॉजी एमएससी के 35 छात्रों को सिंफर के वैज्ञानिकों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षण में वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट, सॉयल क्वालिटी, बायोडायवर्सिटी, माइनिंग इंपैक्ट और इकोलॉजिकल डाइवर्सिटी जैसे विषयों पर प्रैक्टिकल जानकारी दी जा रही है. इसका मकसद पर्यावरण संतुलन को बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्रों के कौशल को निखारना है, जिससे वे भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें.
वैज्ञानिकों द्वारा छात्रों को पानी की वर्तमान समस्या, भविष्य की चुनौतियों व उनसे निपटने के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी भी दी जा रही है. यह प्रशिक्षण हाल के वर्षों में दूषित पानी से होने वाली मौतों जैसी घटनाओं को रोकने में भी कारगर साबित हो सकता है.
सिंफर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुदर्शन सिंह राठौर ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को पानी और मिट्टी में मौजूद हानिकारक तत्वों की पहचान, उनके प्रभाव और उन्हें कम करने के उपाय प्रैक्टिकल के माध्यम से सिखाए जा रहे हैं. माइनिंग के कारण हवा, पानी और मिट्टी में बढ़ रहे प्रदूषण से निपटने के लिए छात्रों को तैयार किया जा रहा है ताकि उनमें व्यावसायिक कौशल का विकास हो सके.
वैज्ञानिक डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि छात्रों का कौशल विकास ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है.छात्र यहां से सीखकर अपने समाज में जागरूकता फैलाएंगे और किसी भी पर्यावरणीय समस्या का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि यदि लोगों को पानी की गुणवत्ता की सही जानकारी होती तो कई जगहों पर दूषित पानी से हुई मौतों जैसी घटनाओं को रोका जा सकता था.
प्रशिक्षण ले रहीं छात्रा मेघा लाहिरी ने कहा कि यहां उन्हें वह व्यावहारिक ज्ञान मिल रहा है जो विश्वविद्यालय में संभव नहीं हो पा रहा था .यह प्रशिक्षण भविष्य में नौकरी के अवसर बढ़ाने में मददगार साबित होगा. वहीं छात्रा राखी कुमारी ने इसे निजी जीवन के लिए भी बेहद उपयोगी बताया. कहा कि इससे आने वाली पीढ़ी को बेहतर पर्यावरण देने में मदद मिलेगी. छात्रा प्रीति कुमारी ने कहा कि कौशल विकास के लिए यह प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है. प्रैक्टिकल नॉलेज से आत्मविश्वास बढ़ता है और वे जो सीखकर जाएंगी उससे समाज को भी जागरूक कर सकेंगी.
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