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Court News: बक्सर जेल ब्रेक में बर्खास्त कक्षपाल की सेवा होगी बहाल, HC ने 3 महीने का दिया समय

Patna News: बक्सर सेंट्रर जेल ब्रेक के वक्त वार्डर उपेंद्र दास ड्यूटी पर तैनात थे. जेल प्रशासन ने उनपर लापरवाही और कैदियों को भगाने में मदद करने का आरोप लगाते हुए तुरंत निलंबित कर दिया और 19 जनवरी 2018 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.
 
पटना हाईकोर्ट

Patna News: बक्सर जेल ब्रेक मामले में बर्खास्त वार्डर की सेवा बहाल करने का आदेश पटना हाईकोर्ट ने दिया है. 30 दिसंबर 2016 की मध्य रात्री बक्सर सेंट्रल जेल की दीवार फांदकर 5 कैदी फरार हो गए थे. इनके नाम देवधारी राय, प्रदीप सिंह, सोनू सिंह, सोनू पांडे और उपेंद्र शाह है. जिसमें देवधारी बलात्कार और हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहा था. कैदी प्रदीप सिंह को कोर्ट से फांसी की सजा मिली हुई थी.

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घटना के वक्त वार्डर उपेंद्र दास ड्यूटी पर तैनात थे. जेल प्रशासन ने उनपर लापरवाही और कैदियों को भगाने में मदद करने का आरोप लगाते हुए तुरंत निलंबित कर दिया और 19 जनवरी 2018 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.

 

घटना के करीब 10 साल बाद इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने उत्तर चक्र के दफा इंचार्ज व जेल वार्ड उपेंद्र दास की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया.

 

जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार और जेल प्रशासन की पूरी विभागीय जांच प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण और गैर कानूनी करार दिया. मामले पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि विभाग ने बिना किसी ठोस सबूत और गवाहों के सिर्फ अनुमानों और रिपोर्टों के आधार पर इतना बढ़ा निर्णय ले लिया था.

 

कोर्ट ने अपने निर्णय में मुख्य रूप से इस खामियों को रेखांकित किया. बिहार सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 का उल्लंघन करते हुए किसी भी मुख्य गवाह (जैसे जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक या थाना प्रभारी) का मौखिक बयान दर्ज नहीं कराया गया. केवल कागजी रिपोर्ट पेश कर दी गई, लेकिन उनकी सच्चाई साबित करने के लिए कोई गवाही नहीं हुई. सर्वोच्च न्यायालय के मामलों को हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या अनुमान कभी भी कानूनी सबूत का विकल्प नहीं हो सकता.

 

जांच अधिकारी और अनुशासनिक अथॉरिटी ने जेल मैनुअल की उन धाराओं 830(ii) और 870(ii) का हवाला दिया, जो वार्डर पद क कर्मचारियों पर लागू ही नहीं होता. डीएम और एसपी की संयुक्त रिपोर्ट में खुद इस बात का जिक्र था कि जेल में बिजली, लाइट और सुरक्षाकर्मियों की भारी कमी थी. विभाग इन बुनियादी कमियों को छिपाकर पूरी जवाबदेही अकेले वार्डर पर नहीं डाल सकता.

 

हाईकोर्ट ने उपेंद्र दास को सेवा की सभी शर्तों के साथ बहाल करने का आदेश बिहार सरकार को दिया. साथ ही महानिरीक्षक (कारा एवं सुधार सेवाएं, बिहार) द्वारा पारित बर्खास्तगी आदेश और अपीलीय आदेश दोनों को रद्द कर दिया. कोर्ट ने बर्खास्तगी की अवधि के दौरान के वेतन और सेवा लाभों का निपटारा तीन महीने के भीतर पूरा करने का आदेश जारी किया.

 

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