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डॉक्टरों का ऐलान, मांगें नहीं मानी गई तो 22 अक्टूबर से झारखंड में काम बंद

Ranchi News: डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करना और अस्पतालों में हिंसा की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई शामिल है.
 
बैठक करते डॉक्टर

Ranchi News: झारखंड के डॉक्टरों और स्वास्थ्य संगठनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का रोडमैप तैयार किया है. रांची में हुई राज्य स्तरीय संयुक्त बैठक में डॉक्टरों ने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को अपना साझा एजेंडा बनाया. संगठनों ने कहा है कि सरकार ने 21 अक्टूबर तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो 22 अक्टूबर से पूरे राज्य में संपूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा.

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डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करना और अस्पतालों में हिंसा की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई शामिल है.

 

इसके अलावा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में बदलाव की मांग की गई है. डॉक्टर संगठनों का कहना है कि 50 बेड तक के छोटे और मध्यम अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाए. 50 बेड से अधिक वाले अस्पतालों के लिए नियमों को आसान और व्यावहारिक बनाने की मांग की गई है.

 

सरकारी डॉक्टरों के लिए DACP यानी समय पर प्रमोशन की व्यवस्था लागू करने की भी मांग है. जूनियर डॉक्टरों के वेतन, मातृत्व अवकाश, संविदा से जुड़ी समस्याओं और नियमित भर्ती को लेकर भी संगठन सरकार से कार्रवाई चाहते हैं.

 

निजी अस्पतालों के लिए आयुष्मान भारत योजना के पैकेज रेट बढ़ाने, समय पर भुगतान करने और लंबित दावों का जल्द निपटारा करने की मांग की गई है. अस्पतालों के लाइसेंस और दूसरी मंजूरी के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग भी रखी गई है.

 

मेडिकल छात्रों को समय पर स्टाइपेंड देने और निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड से होने वाली अनधिकृत कटौती रोकने की भी मांग की गई है.

 

आंदोलन की शुरुआत 5 से 8 अक्टूबर तक जनजागरूकता अभियान से होगी. 9 अक्टूबर को डॉक्टर राज्यभर में ब्लैक बैज प्रोग्राम चलाएंगे और प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. 10 से 20 अक्टूबर तक जिलों में बैठक और आंदोलन की तैयारी होगी.

 

21 अक्टूबर को राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. इसके बाद भी सरकार ने मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया, तो 22 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा.

 

चिकित्सा संगठनों ने कहा है कि आंदोलन का उद्देश्य डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, बेहतर कार्य व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराना है. संगठनों ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान मरीजों की देखभाल उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी.

 

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