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7 वर्ष कानूनी लड़ाई लड़कर डॉ मनोज कच्छप बने RU के अस्सिटेंट प्रोफेसर

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा 2018 में बैकलॉग व नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था. जिसमें नागपुरी विषय के अभ्यर्थी डॉ.मनोज कच्छप ने भी आवेदन किया था. डॉ मनोज कच्छप ने बताया कि फरवरी 2020 में नागपुरी विषय का एकेडेमिक मार्क्स निकाला गया. जिसमें नागपुरी विषय के अभ्यर्थी डॉ. मनोज कच्छप को सबसे ज्यादा मार्क्स 85 में 72.10 दिया गया. 23 नवंबर 2021 को नागपुरी विषय का साक्षात्कार सूची जारी किया गया. 

 


लेकिन अत्यधिक मार्क्स, गोल्ड मेडलिस्ट, नेट जेआरएफ शिक्षण अनुभव होते हुए भी अभ्यर्थी का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया. इसके बाद अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद ही अभ्यर्थी को साक्षात्कार सूची में शामिल किया गया. जिसमें 15 मार्क्स के साक्षात्कार में उन्हें 9.5  मार्क्स दिया गया. इस प्रकार कुल 100 मार्क्स में से 81.6 मार्क्स प्राप्त हुआ. जो कि नागपुरी विषय में सबसे अधिक अंक था. 

 

 


हाईकोर्ट के द्वारा 6 मार्च 2024  को अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला सुनाया गया. कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति करने का आदेश दिया. लेकिन जेपीएससी नियुक्ति नहीं कराकर LPA  कर मामले को डबल बेंच में ले गई. फिर हाईकोर्ट के डबल बेंच ने भी अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला सुनाया और जेपीएससी को एक लाख का जुर्माना लगाया. दो सप्ताह के अंदर जॉइनिंग कराने का आदेश दिया. 

 


लेकिन जेपीएससी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गई. वहां भी झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को ही बरकरार रखा गया. 24 नवंबर 2025 को अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला सुनाया गया. जिसके बाद जेपीएससी के द्वारा रिजल्ट नोटिफाई करके रांची यूनिवर्सिटी के द्वारा स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग में डॉ. मनोज कच्छप को नियुक्ति किया गया. इस प्रकार लगभग विज्ञापन के 7 वर्षों बाद काफी संघर्ष के बाद अभ्यर्थी की नियुक्ति हुई.

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