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रिनपास में dTMS मशीन होगी स्थापित, समझौता ज्ञापन पर हुआ हस्ताक्षर

सीसीएल ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सोमवार को सीसीएल में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज (रिनपास), और रोटरी फाउंडेशन के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया गया.
 

Ranchi: सीसीएल ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सोमवार को सीसीएल में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज (रिनपास), और रोटरी फाउंडेशन के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया गया. 

 

करीब 2 करोड़ की परियोजना

इस समझौते के तहत रांची स्थित रिनपास में अत्याधुनिक BrainsWay dTMS System (डीप ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन) मशीन स्थापित की जाएगी. जिसमें H1, H4 एवं H7 कॉइल्स की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. यह तकनीक पूर्णतः नॉन-इनवेसिव है और मस्तिष्क के गहरे हिस्सों को लक्षित कर मानसिक रोगों के प्रभावी उपचार में सहायक सिद्ध होती है. परियोजना की कुल लागत 1,98,72,488 रूपये (तीन वर्षों के AMC सहित) है, जिसका वित्तीय वहन सीसीएल द्वारा CSR के अंतर्गत किया जाएगा. 

 

जाने क्या है तकनीक

BrainsWay dTMS तकनीक उन्नत H-कोइल आधारित प्रणाली है, जिसके माध्यम से मस्तिष्क के न्यूरल नेटवर्क को द्विपक्षीय रूप से उत्तेजित एवं मॉड्युलेट किया जा सकता है. यह तकनीक अवसाद (Depression), ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) और निकोटीन एडिक्शन जैसी मानसिक बीमारियों के उपचार में प्रभावी पाई गई है. यह मशीन US Food and Drug Administration (FDA) द्वारा अनुमोदित है औऱ H-कोइल तकनीक धूम्रपान त्याग (Smoking Cessation) के लिए भी FDA से स्वीकृत है.


हर साल 600 रोगियों को मिलेगा लाभ 

मानसिक बीमारी हर दिन बढ़ रहे है. इस परियोजना से प्रतिवर्ष 600 से अधिक मरीजों का लाभ मिल सकता है. इसके साथ ही गंभीर मानसिक रोगों से ग्रसित मरीजों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है. इसके साथ ही dTMS उपचार को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना(PMJAY) एवं झारखंड राज्य स्वास्थ्य योजना के साथ समन्वित किया जाएगा.

 

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