- ईफिको ग्राउंड और फुटबॉल ग्राउंड में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
- रामगढ़ में धू-धू कर जला रावण का पुतला
- जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा शहर
- बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
Ramgarh News : रामगढ़ में असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया. इस अवसर पर शहर के कई स्थानों पर भव्य रावण दहन कार्यक्रम हुआ.
रामगढ़ के ईफिको ग्राउंड और फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा और लोगों ने उत्साह के साथ इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व का आनंद लिया.
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रामलीला मंचन के बाद भव्य आतिशबाजी ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीराम की कथा पर आधारित रामलीला के मंचन से हुई. कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों को जीवंत करते हुए भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया. रामलीला के माध्यम से दर्शकों को धर्म, सत्य, मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया. इसके बाद रावण दहन किया गया.
रावण दहन के दौरान आकर्षक आतिशबाजी हुई. रंग-बिरंगी रोशनी और पटाखों की गूंज के बीच जब रावण का पुतला धू-धू कर जला, तो श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला.
जानें क्यों मनाया जाता है दशहरा
दशहरा मनाने के पीछे रामायण से जुड़ी एक धार्मिक मान्यता है. मान्यता के अनुसार, लंका के राजा रावण ने माता सीता का हरण किया था. इसके बाद भगवान श्रीराम ने वानर सेना की सहायता से लंका पर चढ़ाई की और युद्ध में रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया. इसी विजय की स्मृति में विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है और रावण के पुतले का दहन किया जाता है.
यह पर्व केवल एक पौराणिक घटना का स्मरण नहीं है, बल्कि मानव जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण सीख भी देता है. रावण विद्वान, शक्तिशाली और अनेक गुणों से संपन्न होने के बावजूद अपने अहंकार, अनुचित आचरण और अधर्म के कारण विनाश को प्राप्त हुआ. वहीं भगवान श्रीराम ने सत्य, मर्यादा, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए विजय प्राप्त की.
बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है दशहरा
दशहरा हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, सत्य और धर्म का मार्ग अंततः विजय की ओर ले जाता है. रावण दहन का वास्तविक संदेश केवल पुतले को जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, अन्याय और द्वेष जैसी बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेना भी है.
रामगढ़ में आयोजित भव्य रावण दहन कार्यक्रम ने एक बार फिर लोगों को यही संदेश दिया कि समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना ही इस पर्व की सच्ची भावना है. भगवान श्रीराम की विजय का उत्सव मनाते हुए श्रद्धालुओं ने दशहरा पर्व की परंपरा को उत्साह और आस्था के साथ आगे बढ़ाया.

