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E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग : पेट्रोलियम मंत्रालय बचाव में उतरा, कहा, वर्षों की जांच के बाद किया फैसला

New Delhi : भारत में जारी E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. इसकी काफी आलोचना हो रही है. आज शुक्रवार को  पेट्रोलियम मंत्रालय  खुल कर इसके बचाव में उतर आया. बयान जारी कर कहा कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम मौजूदा(मोदी) सरकार के समय शुरू नहीं हुआ था.

  

 

मंत्रालय ने कहा कि E10 से E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग में बदलाव कई सालों की टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरर्स के साथ गहन बातचीत और फील्ड के अनुभव पर आधारित है. मंत्रालय के अनुसार 2001 में एक पायलट इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम शुरू हुआ था. 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा हुई. बताया कि 2006 तक कई राज्यों में E5 (5 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग) लागू हो गया था.  

 

पेट्रोलियम मंत्रालय  ने UPA सरकार का जिक्र करते हुए बताया कि जनवरी 2013 में Gazette of India में पॉलिसी फ्रेमवर्क को अधिसूचित कर दिया गया था. यह सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं. E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग के संबंध में मंत्रालय ने बताया कि नीति आयोग ने वाहन कंपनियों, तेल कंपनियों और विशेषज्ञों से चर्चा के बाद इथेनॉल मिश्रण को लेकर विस्तृत योजना तैयार की थी.

 

 

जब देश में इथेनॉल उत्पादन की क्षमता बढ़ी, तभी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य सरकार ने तय किया. मंत्रालय ने  सफाई देते हुए कहा कि इसलिए यह कहना सही नहीं है कि भारत ने जल्दबाजी में E20 ईंधन को अपनाया.मंत्रालय ने कहा कि E20 लागू करने से पहले वाहन कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों से कई दौर का मंथन किया गया.

 

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वाहन कंपनियों के अनुभव में E20 से जुड़े किसी बड़े नुकसान या वाहन के हिस्सों पर गलत प्रभाव के प्रमाण नहीं मिले हैं.

 

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