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बिहार सिपाही भर्ती पेपर लीक में ED की कार्रवाई, कौशिक कुमार की दो करोड़ की संपत्ती जब्त

Patna News: कैल्टेक्ट मल्टीवेंचर्स के पास न तो पहले से प्रिंटिंग का अनुभव था और न ही अपनी प्रिंटिंग प्रेस, इसके बावजूद कंपनी ने बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने क ठेका हासिल कर लिया. बाद में ठके की शर्तों का उल्लंघन करते हुए छपाई का काम ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को दे दिया.
 
प्रवर्तन निदेशालय

Patna News: बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा 2003 पेपर लीक मामले ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पटना जोनल कार्यालय ने आरोपी कौशिक कुमार से जुड़ी 2.01 करोड़ की 5 अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से जब्त कर लिया है. ईडी के मुताबिक, ये संपत्तियां एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज थी. ईडी के अनुसार, कंपनी पर वास्तविक नियंत्रण कौशिक कुमार का था.

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जांच के मुताबिक, कैल्टेक्ट मल्टीवेंचर्स के पास न तो पहले से प्रिंटिंग का अनुभव था और न ही अपनी प्रिंटिंग प्रेस, इसके बावजूद कंपनी ने बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने क ठेका हासिल कर लिया. बाद में ठके की शर्तों का उल्लंघन करते हुए छपाई का काम ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को दे दिया.

 

बता दें कि बिहार पुलिस में कांस्टेबल के 21391 पदों पर भर्ती क लिए केंद्रीय चयन पर्षद यानी सीएसबीसी ने 9 जून 2023 को नोटिफिकेशन जारी किया था. जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, लिखित परीक्षा का आवेदन 1,7 और 15 अक्टूबर 2023 को तीन चरणों में किया गया था. हालांकि, एक अक्टूबर को हुई परीक्षा दोनों पालियों के बाद पेपर लीक और नकल को लेकर खबरें सामने आई थीं. इसके बाद 3 अक्टूबर 2023 को, बोर्ड ने 1 अक्टूबर को ली गई परीक्षा रद्द कर दी. ये परीक्षा फिर 7 और 15 अक्टूबर को होने वाली परीक्षाएं भी स्थिगित कर दी थी. बाद में यह परीक्षा अगस्त 2024 में लिया गया, जिसका रिजल्ट 14 नवंबर 2024 को जारी हुआ था.

 

ईडी की जांच के अनुसार प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाते समय रास्ते में ही लीक कर दिया गया था. इस मामले में ईडी ने बिहार आर्थिक अपराध इकाई की एफआईआर और 22 अगस्त 2024 को दाखिल चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की थी. 

 

इस मामले की जांच में सामने आया कि कैल्टेक्स को पेपर छपाई के काम के लिए 5.9 करोड़ रुपये एडवांस मिले थे. ईडी के मुताबिक इस रकम का कुछ हिस्सा ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजा गया,जबकि करीब 2.01 करोड़ रुपये अलग-अलग कथित फर्जी कंपनियों के जरिए दूसरी जगह ट्रांसफर किए गए. ईडी का कहना है कि इन कंपनियों का वास्तविक कारोबारी कामकाज नहीं था और लेन-देन के जरिए पैसों का स्रोत छिपाने की कोशिश की गई.

 

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