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ईडी ने किया 2883 करोड़ के शराब घोटाला का खुलासा: विधु गुप्ता व सिद्धार्थ सिंघानिया मुख्य आरोपी

Ranchi : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ राज्य के उत्पाद विभाग से जुड़े एक बड़े 2883 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले का खुलासा किया है. इस मामले में ईडी ने 26 दिसंबर 2025 को एक और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन शिकायत दर्ज की है, जिसमें झारखंड भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा पूर्व में गिरफ्तार किए गए विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया सहित 81 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है.

 

ईडी की जांच में सामने आया है कि 2019 से 2023 के बीच एक सुनियोजित आपराधिक सिंडिकेट ने राज्य की शराब नीति का दुरुपयोग किया. इस सिंडिकेट ने अवैध कमीशन और बिना हिसाब वाली शराब की बिक्री के माध्यम से भारी मात्रा में काली कमाई की.

 

झारखंड से कनेक्शन: विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया 

इस बड़े घोटाले में झारखंड एसीबी द्वारा पूर्व में गिरफ्तार किए गए दो प्रमुख व्यक्तियों, विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया को मुख्य आरोपी बनाया गया है. विधु गुप्ता (डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लायर) प्रिज्म होलोग्राफी सिक्यूरिटी फिल्म्स प्रा. लि. के एमडी हैं.

 

झारखंड एसीबी ने उन्हें 3 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था, हालांकि उन्हें 24 अगस्त को बेल मिल गई. उनकी कंपनी पर झारखंड में होलोग्राम सप्लाई के लिए अधिकारियों को 9% कमीशन देने और नकली होलोग्राम सप्लाई करने का भी आरोप है.

 

जांच में पता चला है कि यह कमीशन मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे तक भी पहुंचा था.  इससे पहले छत्तीसगढ़ के कारोबारी सिंघानिया को एसीबी ने 18 जून 2025 को गिरफ्तार किया था और उन्हें 25 अगस्त को बेल मिल गई थी.

 

शराब घोटाले के आरोपी विधु गुप्ता का रांची जेल में नाचते वीडियो वायरल हुआ था

शराब घोटाला मामले में एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों का जेल के अंदर नाचते हुए वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में जो शख्स नाचते हुए दिखाई दे रहे थे उनका नाम विधु गुप्ता और विक्की भलोटिया था. समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण विधु गुप्ता को इस केस में डिफॉल्ट बेल मिल गई थी.

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अवैध कमाई के चार मुख्य तरीके 

- अवैध कमीशन: ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आधिकारिक बिक्री पर शराब सप्लायरों से रिश्वत ली गई.

- बिना हिसाब वाली बिक्री: एक समानांतर प्रणाली चलाई गई, जहां सरकारी दुकानों के माध्यम से नकली होलोग्राम का उपयोग करके ऑफ-द-बुक्स देसी शराब बेची गई. इस बिक्री पर सभी आबकारी शुल्क और करों की चोरी की गई.

- कार्टेल कमीशन: डिस्टिलरों ने बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने और राज्य में परिचालन लाइसेंस सुरक्षित करने के लिए सिंडिकेट को वार्षिक रिश्वत का भुगतान किया.

- FL-10A लाइसेंस: विदेशी शराब निर्माताओं से कमीशन वसूलने के लिए एक नई लाइसेंस श्रेणी शुरू की गई, जिसमें अर्जित 60% मुनाफा सीधे सिंडिकेट की जेब में गया.

 

 सिंडिकेट में विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया समेत अन्य प्रमुख आरोपी 

- सिद्धार्थ सिंघानिया (नकदी संग्रहकर्ता) और विधु गुप्ता (डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लायर) भी इस घोटाले के प्रमुख आरोपी है.

- अनिल टुटेजा: (सेवानिवृत्त आईएएस): तत्कालीन संयुक्त सचिव, इन्हें नीति में हेरफेर करने में केंद्रीय भूमिका के लिए नामजद आरोपी बनाया गया.

- निरंजन दास (आईएएस): सिंडिकेट के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने में शामिल.

- अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस): अवैध वसूली को अधिकतम करने और बिना हिसाब वाली शराब संचालन का समन्वय करने का काम सौंपा गया था.

- जनार्दन कौरव और इकबाल अहमद खान सहित 30 फील्ड अधिकारियों पर फिक्स्ड प्रति-केस कमीशन" के बदले बिना हिसाब वाली शराब की बिक्री में मदद करने का आरोप है.

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