Ranchi : आदिवासी छात्र संघ (ACS) ने रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा को तत्काल पद से हटाने की मांग को लेकर राजभवन में राज्यपाल सह कुलाधिपति से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कार्यकारी अध्यक्ष दया राम, केंद्रीय अध्यक्ष बादल भोक्ता और अध्यक्ष अमित मुंडा ने किया.
संघ ने कुलपति के खिलाफ दिल्ली में दर्ज आपराधिक मामलों, पूर्व सेवा से हटाए जाने और नैतिक अधमता से जुड़े दस्तावेज सौंपते हुए अविलंब कार्रवाई की मांग की है. ACS का आरोप है कि कुलपति की नियुक्ति के समय महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया गया.
रोहिणी कोर्ट के आदेश का हवाला
आदिवासी छात्र संघ ने दावा किया कि दिल्ली के समयपुर बादली थाना में दर्ज FIR No. 863/2024, जो कथित संस्थागत प्रताड़ना और आत्महत्या मामले से जुड़ी है, उसमें रोहिणी कोर्ट द्वारा दिया गया आदेश तकनीकी क्लोजर रिपोर्ट है, न कि आरोपों से ससम्मान बरी किया जाना. संगठन का कहना है कि मामले में पीड़ित परिवार ने दबाव में आकर क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किया.
NIOS से जुड़े आरोप
ACS ने यह भी आरोप लगाया कि प्रो. सरोज शर्मा को पूर्व में NIOS (राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान) के अध्यक्ष पद से गंभीर विसंगतियों के कारण हटाया गया था. संगठन का कहना है कि कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान इस तथ्य और दिल्ली में दर्ज FIR की जानकारी राजभवन से छुपाई गई.
संघ की प्रमुख मांगें
आदिवासी छात्र संघ ने राज्यपाल से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं
1. प्रो. सरोज शर्मा को कुलपति पद से तत्काल बर्खास्त किया जाए.
2. जांच पूरी होने तक उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगाई जाए.
3. पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए.
आंदोलन की चेतावनी
ACS ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे झारखंड में उग्र आंदोलन, शैक्षणिक चक्का जाम और रांची विश्वविद्यालय की तालाबंदी की जाएगी. संगठन का कहना है कि छात्र-छात्राएं वर्तमान परिस्थिति में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
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