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Education News : प्रभार के भरोसे JUT ,तीन साल बाद भी नियमित नियुक्तियों का इंतजार

झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT) राज्य का प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालय है, लेकिन इसके कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद लंबे समय से नियमित नियुक्तियों के बजाय प्रभारी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहे हैं.
 
झारखंड की खबरें

Ranchi : झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT) राज्य का प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालय है, लेकिन इसके कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद लंबे समय से नियमित नियुक्तियों के बजाय प्रभारी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहे हैं. इससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक विकास पर असर देखने को आय दिन मिलती है.

 

 

राजभवन ने अक्टूबर 2023 में अधिसूचना (फाइल संख्या JUT-02/2023-3097/G.S.) जारी कर विश्वविद्यालय के संचालन के लिए कुछ पदों पर अंतरिम नियुक्तियां की थीं. आदेश में स्पष्ट किया गया था कि यह व्यवस्था एक वर्ष अथवा नियमित नियुक्ति होने तक, जो पहले हो प्रभावी रहेगी.

 

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इस आदेश के तहत स्नेह कुमार को डायरेक्टर, करिकुलम डेवलपमेंट का अतिरिक्त प्रभार तथा बीआईटी सिंदरी के सहायक प्राध्यापक निशांत कुमार को असिस्टेंट रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया था. लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय के कई अहम पद नियमित अधिकारियों के बजाय प्रभारी व्यवस्था में ही संचालित हो रहे हैं. 

 

इनमें रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी और डायरेक्टर, करिकुलम डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं.स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व के अभाव में नीतिगत निर्णयों की गति प्रभावित होने की बात सामने आती रही है. पाठ्यक्रमों में सुधार, संबद्धता, परीक्षा प्रबंधन, वित्तीय निर्णय और संस्थागत विकास जैसे कार्यों में अपेक्षित निरंतरता नहीं बन पा रही है. इसी वजह से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और दीर्घकालिक विकास को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.

 

कुलपति के मौजूदा कार्यकाल में भी विश्वविद्यालय विभिन्न कारणों से चर्चा में रहा. परीक्षा परिणामों के डिजिटलीकरण में देरी, मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें तथा कुछ प्रशासनिक निर्णयों पर प्रश्न उठाए गए. कुछ मामलों में जांच की मांग भी हुई. हालांकि, इन मामलों में संबंधित जांच या सक्षम प्राधिकारी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और विभिन्न अवसरों पर संबंधित पक्षों ने अपना-अपना पक्ष भी रखा है.अब नजर नए कुलपति की नियुक्ति और लंबे समय से रिक्त पड़े प्रशासनिक पदों पर नियमित नियुक्तियों पर टिकी है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली को बेहतर कर सके.

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