Ranchi : सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (CUJ) के वैज्ञानिकों ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है. विश्वविद्यालय के ऊर्जा इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने संध्या मालती (Mirabilis Jalapa) फूल की पंखुड़ियों से पर्यावरण-अनुकूल और कम लागत वाला सोलर सेल विकसित किया है.

यह शोध डाई-सेंसिटाइज्ड सोलर सेल्स (DSSC) तकनीक पर आधारित है, जिसमें फूलों से निकाले गए प्राकृतिक रंग का उपयोग सेंसिटाइज़र के रूप में किया गया. यह सेंसिटाइज़र सूर्य के प्रकाश को अवशोषित कर बिजली उत्पादन में मदद करता है.
ऊर्जा इंजीनियरिंग विभाग के सह-प्राध्यापक व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. बसुदेव प्रधान ने बताया कि शोध के दौरान सौर सेल ने 0.61 प्रतिशत तक पावर कन्वर्ज़न एफिशिएंसी और करीब 250 घंटे तक स्थिरता दिखाई. उन्होंने कहा कि यह शुरुआती स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और भविष्य में इसकी क्षमता और बढ़ाई जा सकती है.

शोधकर्ताओं के अनुसार, संध्या मालती फूल से प्राप्त प्राकृतिक डाई पूरी तरह गैर-विषैली, जैव-अपघटनीय और बेहद सस्ती है. यह मौजूदा सिंथेटिक और रूथेनियम आधारित डाई की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित मानी जा रही है.
डॉ. प्रधान ने बताया कि फूल के छह प्रमुख रासायनिक घटकों पर किए गए अध्ययन में 13.9 प्रतिशत से 20.8 प्रतिशत तक संभावित दक्षता की संभावना सामने आई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे और शोध के जरिए इस तकनीक को व्यावहारिक और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है.
इस शोध में प्रशांत कुमार, अंशु कुमार, आयुषी परीक, एनामूल हक और अनिक सेन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल Journal of Power Sources में प्रकाशित हुआ है.विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित ऐसी तकनीकें भविष्य में सस्ती और स्वच्छ सौर ऊर्जा को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.


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