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Education News : DSPMU में फीस वृद्धि को लेकर विरोध जारी, छात्रों ने लगाया करोड़ों की वसूली का आरोप

Ranchi : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) के कॉमर्स विभाग में वर्ष 2022 से बढ़ाई गई फीस को लेकर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. पिछले छह महीनों से जारी आंदोलन के बीच गांधी सभागार में विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई, लेकिन इस बैठक में प्रशासन ने साफ कर दिया कि फीस में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी.

 

बैठक में कुलपति प्रो. राजीव मनोहर, रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर, डीएसडब्ल्यू और वित्त विभाग के अधिकारी मौजूद रहे. करीब एक घंटे तक चली चर्चा के बाद प्रशासन ने फीस कम करने से इनकार करते हुए छात्रों को आश्वासन दिया कि अगले दो से तीन महीनों के भीतर विभाग में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इसमें स्मार्ट बोर्ड, लाइब्रेरी, लैब, आरओ वाटर और साफ-सुथरे वाशरूम जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

 

इसके साथ ही प्रशासन ने गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की सहायता के लिए ‘पुअर बॉयज फंड’ के तहत एक समिति गठित करने की बात कही, ताकि जरूरतमंद छात्रों की फीस माफ की जा सके.

 

हालांकि, प्रशासन के इन आश्वासनों से छात्र संतुष्ट नजर नहीं आए. छात्रों का कहना है कि वर्ष 2022 में यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों की फीस 5 से 7 हजार रुपये  सालाना लिए जाते थे उसे बढ़ाकर लगभग 15 हजार रुपये कर दी गई. 

 

अब फीस प्रति सेमेस्टर लिए जाते है. लेकिन इसके बावजूद विभाग में सुविधाओं का अभाव बना हुआ है. छात्रों ने सवाल उठाया कि जो काम पिछले चार वर्षों में नहीं हो सका, वह आखिर तीन महीनों में कैसे पूरा होगा.

 

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग में करीब 2000 छात्र हैं और हर साल औसतन दो करोड़ रुपये फीस के रूप में वसूले जा रहे हैं. उनका आरोप है कि डेवलपमेंट फंड के नाम पर लिए गए पैसों का कोई स्पष्ट हिसाब छात्रों को नहीं दिया जा रहा है. छात्रों ने इसे करोड़ों की लूट करार दिया.

 

वहीं, इस पूरे विवाद पर विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया भी सवालों के घेरे में है. कुलपति प्रो. राजीव मनोहर ने इस मुद्दे को छोटा मामला बताते हुए मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया. रजिस्ट्रार ने मामला डीएसडब्ल्यू पर डाल दिया, जबकि डीएसडब्ल्यू भी बिना कोई प्रतिक्रिया दिए वहां से निकल गए.

 

छात्रों का आरोप है कि अधिकारी लगातार उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजकर केवल टालमटोल कर रहे हैं और उनकी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है.

 

 

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