Ranchi : रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले मारवाड़ी कॉलेज में नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम के विरोध में शिक्षकों और छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया. शिक्षक काला रिबन बांधकर धरने पर बैठे, वहीं छात्र संगठनों ने भी इस आंदोलन को खुला समर्थन दिया. प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की.
शिक्षकों का आरोप है कि क्लस्टर सिस्टम को बिना किसी पूर्व चर्चा और तैयारी के लागू किया जा रहा है. उनका कहना है कि इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग कॉलेजों को विशेष विषयों तक सीमित किया जा रहा है.
उदाहरण के तौर पर, मारवाड़ी कॉलेज को केवल कॉमर्स कॉलेज के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे अन्य विषयों के छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे कॉलेजों का चक्कर लगाना पड़ेगा.शिक्षकों ने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने पर आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स के छात्र अपने माइनर या अन्य विषयों की कक्षाओं के लिए अलग-अलग कॉलेजों में जाएंगे. इससे छात्रों का समय और आर्थिक संसाधन दोनों प्रभावित होंगे.
साथ ही शिक्षकों को भी विभिन्न कॉलेजों में जाकर पढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, लेकिन इसके लिए किसी प्रकार का यात्रा भत्ता (TA/DA) देने की व्यवस्था नहीं की गई है.प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने यह भी कहा कि यह क्लस्टर सिस्टम नई शिक्षा नीति की मूल भावना के खिलाफ है, जिसमें छात्रों को अपनी पसंद के विषय चुनने की स्वतंत्रता देने की बात कही गई थी. उनका कहना है कि अब छात्रों की पसंद सीमित हो जाएगी और स्थानीय स्तर पर पढ़ाई करना मुश्किल हो जाएगा.
शिक्षकों ने विशेष रूप से गरीब, आदिवासी और दलित छात्रों पर इसके नकारात्मक प्रभाव की चिंता जताई. उनका कहना है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले छात्र आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि वे रोज अलग-अलग कॉलेजों में जाकर पढ़ाई कर सकें. इससे उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच और कमजोर होगी.छात्र संगठनों ने भी इस आंदोलन को सही बताते हुए कहा कि पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की नियुक्ति और परिवहन व्यवस्था के बिना क्लस्टर सिस्टम लागू करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.
छात्र नेताओं ने आशंका जताई कि विषयों के बंटवारे से भविष्य में शिक्षकों की नियुक्तियां भी कम हो सकती हैं, जिसका असर पूरे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा.प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू हुई तो छात्रों का पूरा दिन एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज जाने में ही बीत जाएगा और पढ़ाई का माहौल प्रभावित होगा. शिक्षक और छात्रों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार कर इसे तत्काल रोकने की मांग की है.
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