- आदिवासियत और संवैधानिक अधिकारों पर हुई चर्चा
Ranchi : गोस्सनर कॉलेज के एंथ्रोपोलॉजी विभाग की ओर से मंगलवार को कॉलेज ऑडिटोरियम में दो दिवसीय मानवशास्त्रीय सेमिनार का शुभारंभ किया गया.सेमिनार का विषय आदिवासियत – संवैधानिक प्रावधान और समस्याएं रखा गया है.जिसमे शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया. इस अवसर पर कॉलेज की प्रो. इंचार्ज प्रो. इलानी पूर्ति भी उपस्थित रहीं. कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई.
सेमिनार के प्रथम दिन मुख्य वक्ता के रूप में आईएएस अधिकारी रवि शंकर शुक्ला ने हूल, हूल की कहानी, संथाल विद्रोह एवं एकजुटता विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होंने संथाल हूल के इतिहास, आदिवासी समाज के संघर्ष और सामाजिक एकजुटता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला.
इसके बाद प्रो. बलराम उरांव ने भारत के जनजातीय समाज की वर्तमान स्थिति और उनके समक्ष मौजूद चुनौतियों पर अपने विचार रखे. सामाजिक कार्यकर्ता व लेखिका दयामणि बरला ने पेसा अधिनियम (PESA Act) की आवश्यकता तथा आदिवासी क्षेत्रों में उसके प्रभाव और महत्व को समझाया. वहीं लॉ कॉलेज, रांची के प्रो. वाल्टर कंडुलना ने भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची पर व्याख्यान देते हुए आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी.
सेमिनार के मुख्य अतिथि व मॉडरेटर मार्शल करकेटा ने कहा कि आदिवासी समाज आज भी प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है और उनकी जीवनशैली, संस्कृति तथा परंपराएं प्रकृति पर आधारित हैं. उन्होंने कहा कि समय के साथ आदिवासियों को उनके मूल जीवन मूल्यों और कर्तव्यों से दूर कर उनका शोषण किया गया, जिससे वे धीरे-धीरे दूसरों पर निर्भर होते गए.
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के समय से आदिवासियों पर लगातार हमले होते रहे, जिसके कारण भगवान बिरसा मुंडा तथा सिद्धो-कान्हू जैसे महानायकों ने आदिवासियत और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया. उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में सीएनटी (CNT) एक्ट और एसपीटी (SPT) एक्ट जैसे कानून जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं.
सेमिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आदिवासी समाज, उनकी संस्कृति, संवैधानिक अधिकारों और वर्तमान चुनौतियों के प्रति जागरूक करना है. कार्यक्रम का दूसरा दिन 22 जुलाई को आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार प्रस्तुत करेंगे.
कार्यक्रम का संचालन एंथ्रोपोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एस. के. मुर्मू ने किया. इस अवसर पर डॉ. मीना तिर्की, प्रो. योताम कुल्लू, प्रो. आमोश तोपनो, प्रो. हेमंत टोप्पो, प्रो. अभिषेक तोपनो सहित कॉलेज के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे.


Leave a Comment