Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले के आरोपी अब्दुल हफीज (63 वर्षीय) को जमानत दे दी है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा है कि कथित रिश्वत की रकम सह-आरोपी सरकारी कर्मचारी बिंदेश तिर्की के पास से बरामद हुई थी, जिसे पहले ही जमानत मिल चुकी है.
कोर्ट ने कहा कि अब्दुल हफीज के पास से रिश्वत की कोई रकम बरामद नहीं हुई थी. मामले में आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका मंजूर कर ली. (पढ़े...पुलिस की लापरवाही से जनता का भरोसा टूटता है, दोषी अधिकारियों पर हो सख्त कार्रवाई : झारखंड HC)
अब्दुल हफीज की ओर से दी गई दलील
अब्दुल हफीज की ओर से अदालत को बताया गया कि वह सरकारी कर्मचारी नहीं है और 18 जून 2026 से जेल में बंद है. एसीबी, रांची थाना कांड संख्या 07/2025 में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7(ए) के तहत मामला दर्ज है.
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि जिस स्थान पर ट्रैप किया गया था, वहां याचिकाकर्ता मौजूद नहीं था. उनके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है. एसीबी की ओर से जमानत का विरोध किया गया. हालांकि बचाव पक्ष की अन्य दलीलों पर कोई विवाद नहीं किया गया.
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जमानत के साथ लगायी गयीं शर्तें
याचिकाकर्ता और एसीबी दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत देने का निर्देश दिया.
अदालत ने निर्देश दिया कि निचली अदालत आरोपी का आपराधिक इतिहास सत्यापित करायेगी. यदि कोई आपराधिक इतिहास मिलता है, तो उसे रिहा नहीं किया जायेगा. जमानतदारों में एक वर्तमान पैरवीकार और दूसरा करीबी रिश्तेदार होना चाहिए.
आरोपी को प्रत्येक सुनवाई की तारीख पर अदालत में उपस्थित रहना होगा. एक बार भी अनुपस्थित रहने पर जमानत बांड रद्द किया जा सकता है. इसके अलावा उसे आधार कार्ड की स्वहस्ताक्षरित प्रति और मोबाइल नंबर अदालत में जमा करना होगा.
मुकदमे के दौरान अदालत की पूर्व अनुमति के बिना मोबाइल नंबर बदलने की अनुमति नहीं होगी. आरोपी को न्यायिक कार्यवाही में पूरा सहयोग करने का भी निर्देश दिया गया है.

