- वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की लापरवाही की जांच में देरी पर HC नाराज
Ranchi News: बोकारो की लापता लड़की के मामले में पुलिस की लापरवाही की जांच में लगातार देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की पीठ ने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच का आदेश देने में चार महीने की देरी इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले में गंभीरता से काम नहीं कर रहा है.
अदालत ने कहा कि नागरिकों का सरकार और पुलिस व्यवस्था पर विश्वास कायम रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसके लिए जरूरी है कि मामले की सच्चाई सामने लायी जाये और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाये. अदालत ने कहा कि ऐसे कदमों से ही जनता का विश्वास बहाल हो सकता है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विंसेंट रोहित मार्की, शांतनु गुप्ता ने पक्ष रखा. वहीं राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने पक्ष रखा.
इसे भी पढ़ें -
क्या है पूरा मामला
बोकारो के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र की 18 वर्षीय लड़की जुलाई 2025 में लापता हो गई थी. परिजनों ने बार-बार पुलिस से संपर्क किया, लेकिन लड़की का कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद लापता लड़की की मां ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर जंगल से लड़की का कंकाल बरामद किया. पुलिस का आरोप है कि उसके पूर्व प्रेमी ने उसकी हत्या की थी. कोर्ट ने शव के अवशेषों और माता-पिता के DNA की तुलना कराने का भी आदेश दिया था.
28 पुलिसकर्मियों पर लटकी तलवार
कोर्ट को बताया गया कि जांच में पिंडराजोरा थाने में तैनात सभी 28 पुलिसकर्मियों की ओर से कर्तव्य में लापरवाही के प्राथमिक साक्ष्य मिले हैं. इसके बाद बोकारो के पुलिस अधीक्षक के आदेश से उन्हें निलंबित करने का निर्णय लिया गया है.
लेकिन हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब लड़की की तलाश नहीं हो रही थी और उसके माता-पिता की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही थी, तब जिले के पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी क्या कर रहे थे? कोर्ट ने कहा कि आरोपी को जल्दी गिरफ्तार करने के लिए प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हुई, इसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
चार महीने बाद जांच का आदेश
कोर्ट ने 25 जून 2026 को ही राज्य सरकार से पूछा था कि क्या बोकारो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही की जांच कराई जाएगी. लेकिन 3 अगस्त, 17 अगस्त और 17 सितंबर को भी राज्य सरकार ने शपथपत्र दाखिल नहीं किया. अंततः 7 अक्टूबर 2026 को पुलिस महानिदेशक ने विशेष शाखा के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कथित लापरवाही की व्यापक जांच का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश के लगभग चार महीने बाद यह कदम उठाना स्वयं सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाता है.
राज्य सरकार ने जांच पूरी करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा था. कोर्ट ने जांच की प्रगति पर शपथपत्र दाखिल करने का मौका देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

