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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में ‘कॉमन्स’ पर जोर एक स्वागतयोग्य कदम

Ranchi: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 30 जनवरी को लोकसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में गांवों के ‘कॉमन्स’ (साझा प्राकृतिक संसाधनों) को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है. सर्वेक्षण में पहली बार गांवों के साझा संसाधनों को एक अलग भूमि-उपयोग श्रेणी के रूप में औपचारिक मान्यता देने की जरूरत पर जोर दिया गया है, जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

 

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि गांवों के कॉमन्स का पुनरुद्धार ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है. इन संसाधनों के संरक्षण और पुनर्स्थापन से आजीविका को मजबूती मिलेगी, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होगी और ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक एवं जलवायु संकट से निपटने की क्षमता बढ़ेगी. 

 

सर्वेक्षण के अनुसार, कॉमन्स का क्षरण कृषि उत्पादन में गिरावट, जलस्तर में कमी, वनों और चरागाहों के नष्ट होने का बड़ा कारण है, जिससे ग्रामीण आय घट रही है और पलायन बढ़ रहा है.

 

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि गांवों के साझा संसाधनों के संरक्षण के लिए सरकार और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोगात्मक भागीदारी आवश्यक है. इसके लिए कॉमन्स की मैपिंग कर उन्हें राज्य या राष्ट्रीय रजिस्टर में शामिल करने, पंचायतों और गांव-स्तरीय संस्थाओं के माध्यम से बहु-स्तरीय संस्थागत ढांचा विकसित करने की सिफारिश की गई है. राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों के उदाहरण इसका प्रमाण हैं.

 

फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (FES) के कार्यकारी निदेशक सुब्रत सिंह ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में कॉमन्स की अहमियत को स्वीकार करना और उनके संरक्षण की जरूरत को रेखांकित करना एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम है, खासकर तब जब ये संसाधन बड़े पैमाने पर क्षरण का सामना कर रहे हैं.


वहीं  फिया फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक जॉनसन टोपनो ने कहा कि साझा प्राकृतिक संसाधन ग्रामीण समुदायों की भोजन, ईंधन, चारा, औषधि और आय की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं. गैर-काष्ठ वन उत्पाद ग्रामीण और वनवासी समुदायों की आय का बड़ा स्रोत हैं. ऐसे में कॉमन्स को मान्यता देना सामुदायिक संरक्षण को मजबूती देगा.

 

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत के कॉमन्स लगभग 205 मिलियन एकड़ क्षेत्र में फैले हैं और 34 प्रकार की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करते हैं, जिनका वार्षिक आर्थिक मूल्य लगभग 90.5 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है. हालांकि यह मूल्य अब तक औपचारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया है.

 

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण समुदायों, खासकर महिलाओं की भागीदारी के साथ विकेंद्रीकृत और सहभागी शासन व्यवस्था के माध्यम से ही कॉमन्स का संरक्षण संभव है. इसी दिशा में ‘द प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स’ जैसी पहलें पर्यावरणीय स्वास्थ्य और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

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