Ranchi: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की पूर्व संध्या पर फेडरेशन झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की महिला उद्यमिता उप समिति ने चैंबर भवन में कार्यशाला हुआ. इसमें तसर सिल्क, पारंपरिक कला और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा दिए गए. इसके साथ महिला उद्यमिता और कारीगरों को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई. सभी ने स्थानीय हस्तशिल्प को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया.
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इस मौके पर चैंबर महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि झारखंड की पारंपरिक कला और हैंडलूम उद्योग में काफी संभावनाएं हैं. कारीगरों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, ब्रांडिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की जरूरत है, ताकि उन्हें बेहतर बाजार मिल सके.

उप समिति की चेयरपर्सन आस्था किरण ने कहा कि हथकरघा भारत की सांस्कृतिक पहचान के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी मजबूत आधार है. झारखंड के तसर सिल्क को आधुनिक डिजाइन, फैशन और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए देश-विदेश के बाजार तक पहुंचाया जा सकता है.
कार्यशाला में कलाकारों ने पिछवाई कला, सोहराई कला, लोक कला, बंगाल पट्ट चित्र और एब्स्ट्रैक्ट कला का प्रदर्शन किया. जोहार कला की सदस्य सोहिनी ने कहा कि पर्यावरण अनुकूल और हस्तनिर्मित उत्पादों की बढ़ती मांग से झारखंड के कलाकारों के लिए नए अवसर बन रहे हैं.
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