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IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री पर भड़का कर्मचारी संघ, बोला- सार्वजनिक बैंकिंग से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

Ranchi News : झारखंड ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव नितेश कुमार मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और वित्तीय संस्थान देश की अर्थव्यवस्था के साथ आम जनता के हितों से भी जुड़े हैं. ऐसे संस्थानों को निजी या विदेशी पूंजी के हवाले करने के बजाय मजबूत बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था के निजीकरण के प्रयासों का कर्मचारी संगठन लगातार विरोध करते रहे हैं.
 
प्रतीकात्मक चित्र

Ranchi News : आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद अखिल भारतीय क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ (AIRRBEA) ने विरोध जताया है. संगठन ने केंद्र सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था के हितों की रक्षा करने की मांग की है.

 

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झारखंड ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव नितेश कुमार मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और वित्तीय संस्थान देश की अर्थव्यवस्था के साथ आम जनता के हितों से भी जुड़े हैं. ऐसे संस्थानों को निजी या विदेशी पूंजी के हवाले करने के बजाय मजबूत बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था के निजीकरण के प्रयासों का कर्मचारी संगठन लगातार विरोध करते रहे हैं.

 

52,878 करोड़ रुपये में हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव पर सवाल

AIRRBEA के अनुसार, केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की आईडीबीआई बैंक में संयुक्त 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी को कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स से संबद्ध कंपनी को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.

 

संगठन ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि आईडीबीआई बैंक अपनी पिछली कठिनाइयों से उबरकर मुनाफा कमा रहा है. ऐसे में बैंक का नियंत्रण विदेशी निवेशक को सौंपने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए.

 

संगठन ने संसद में सरकारी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से नीचे नहीं जाने को लेकर दिए गए आश्वासन का भी हवाला दिया है. AIRRBEA का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और सामाजिक न्याय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए इनके सार्वजनिक स्वरूप और आम जनता के हितों की रक्षा जरूरी है.

 

ग्रामीण बैंकों और नाबार्ड के भविष्य पर भी चिंता

नितेश कुमार मिश्रा ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक किसानों, छोटे कारोबारियों और ग्रामीण आबादी तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं. इन बैंकों की मजबूती का सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम लोगों की बैंकिंग सुविधाओं से है.

 

AIRRBEA ने नाबार्ड और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है. संगठन के मुताबिक, सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के स्वामित्व और सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने से दूसरे संस्थानों पर भी असर पड़ सकता है.

 

वेतन, पेंशन और पदोन्नति की सुरक्षा की मांग

कर्मचारी संघ ने केंद्र सरकार से आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री पर पुनर्विचार करने के साथ कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, पदोन्नति और सेवा शर्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. संगठन ने बैंक कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मियों से सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है.

 

AIRRBEA का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग देश की महत्वपूर्ण संपत्ति है. इसे निजी या विदेशी हितों को सौंपने के बजाय मजबूत बनाने और आम जनता के हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

 

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