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यूपी में एनकाउंटर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकारा, सजा देना कोर्ट का काम,  पुलिस का नहीं

प्रयागराज की जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की सिंगल बेंच का यह मानना है.  बेंच ने प्रमोशन, सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के लिए गोली चलाने की प्रवृत्ति को गलत और खतरनाक बताया. कहा कि यह अस्वीकार्य है.
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Lucknow :  पुलिस कानून से ऊपर नहीं है. अपराधी को सजा देना कोर्ट का काम है, पुलिस का नहीं. यह कहते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को फटकारा है. हाईकोर्ट ने आरोपियों के पैरों में गोली मारकर उन्हें एनकाउंटर करार देने की पुलिस की प्रवृत्ति पर चिंता जाहिर की है. 


प्रयागराज की जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की सिंगल बेंच का यह मानना है.  बेंच ने प्रमोशन, सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के लिए गोली चलाने की प्रवृत्ति को गलत और खतरनाक बताया. कहा कि यह अस्वीकार्य है. 
 
 
आदेश सुनाते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बैंच पुलिस के लिए 6 बिंदुओं की गाइडलाइंस जारी की और इसका पालन अनिवार्य करार दिया. जस्टिस अरुण कुमार देशवाल ने सुप्रीम कोर्ट के PUCL बनाम महाराष्ट्र मामले में तय दिशा-निर्देश सख्ती से लागू करने का आदेश दिया.


चेताया कि इन निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित SP और SSP सीधे जिम्मेदार होंगे. उन पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है. सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव के समक्ष सवाल उठाया कि क्या पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के पैरों में गोली मारने या एनकाउंटर का दावा करने के लिए सरकार ने किसी तरह का मौखिक या लिखित निर्देश दिये हैं.  


दरअसल कोर्ट मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार के अलावा दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. तीनों अलग-अलग मुठभेड़ों में पुलिस की गोली से घायल हुए थे. कोर्ट ने संज्ञान में लिया कि इन मुठभेड़ों में कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था.   


राज्य सरकार द्वारा कोर्ट को जानकारी दी गयी कि मुठभेड़ को लेकर एफआईआर दर्ज की गयी थी,   घायलों ने इस संबंध में न तो मजिस्ट्रेट के सामने और न ही किसी चिकित्सा अधिकारी के समक्ष कोई बयान दर्ज कराया है. लेकिन हाईकोर्ट ने इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करार दिया.

 

 

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