Lagatar Desk : केंद्र सरकार ने मणिपुर राज्य में AFSPA के तहत अशांत क्षेत्र की घोषणा अगले छह माह के लिए बढ़ा दी है. मणिपुर राज्य मार्च 2027 तक अशांत घोषित रहेगा. इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागालैंड के 9 जिलों को भी अशांत क्षेत्र घोषित किया है.
जारी अधिसूचना के मुताबिक, मणिपुर में कुल 16 जिले हैं. सभी जिलों को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है. सिर्फ पांच जिलों के 13 थाना क्षेत्रों को अशांत क्षेत्र से अलग रखा गया है. इनमें इंफाल वेस्ट के इंफाल, लाम्फेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई, इंफाल ईस्ट जिला के पोरोमपाट, हेइंगांग और इरिलबुंग शामिल हैं.
इसके अलावा थौबाल जिले का थौबाल थाना क्षेत्र, बिष्णुपुर जिला का बिष्णुपुर, नाम्बेल और काकचिंग थाना क्षेत्र शामिल है. (देश-विदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)
इसी तरह नागालैंड राज्य के कुल 17 जिलों में से नौ जिले को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है. जिन जिलों को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है, उनमें दीमापुर, न्यूलैंड, चुमकेदिमा, मोर, किफायत, नोकलाक, फेंक, पेरेन और मेलुरी जिला शामिल है. इसके अलावा अन्य पांच जिलों कोहिमा, मोकेकचुंग, लोंगलेंग, वोखा व जुन्हेबोटो के 21 थाना क्षेत्रों को भी अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया गया है.
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उल्लेखनीय है कि मणिपुर में बीते साढ़े तीन सालों से दो समुदायों के बीच हिंसा जारी है. 300 से अधिक लोग इस हिंसा में मारे जा चुके हैं. हजारों परिवार शिविरों में रहने को मजबूर हैं. मणिपुर में हिंसा की पहली घटना मई 2023 में हुई थी.
इसके बाद से कुकी व नागा समुदाय के बीच हिंसक झड़प, घरों में आग लगाने और गोली-बारी करने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं. गृह मंत्री अमित शाह दो बार मणिपुर जा चुके हैं. मुख्यमंत्री इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन हिंसा का दौर थम नहीं रहा है.
इसी तरह नागालैंड के कुछ हिस्सों में उग्रवादी गतिविधियां चरम पर हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी राज्य के 9 जिलों में उग्रवादी घटनाएं कम नहीं हो रही हैं. इस कारण वहां के नौ जिलों को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है.

