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संसद में संथाली भाषा की एंट्री ने आदिवासियों को गर्व से भर दियाः चंपाई

Ranchi : पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा है कि संसद में संथाली भाषा की एंट्री ने सभी आदिवासियों को गर्व से भर दिया. सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि देश की प्रमुख भाषाओं के साथ, अब संसद में चल रही कार्यवाही का अनुवाद संथाली में भी उपलब्ध होगा.

 

झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, असम समेत कई राज्यों में बोली जाने वाली संथाली भाषा को यह सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के प्रति पूरे आदिवासी समाज की ओर से आभार व्यक्त करता हूं. कहा कि देश की प्रमुख भाषाओं के साथ संसद में संथाली की उपस्थिति, इस भाषा की विकास-यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगी.

 

संसद में नियुक्त किये गए संथाली अनुवादकों को बधाई

 

चंपाई सोरेन ने संसद में नियुक्त किये गए संथाली अनुवादकों को बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी हैं. भारतीय संसद में संथाली भाषा (ओलचिकी लिपि) की एंट्री ने इस भाषा को बोलने वाले करोड़ों लोगों समेत सभी आदिवासियों को गर्व से भर दिया है. भाषा, संस्कृति एवं लोक परंपराएं आदिवासी समाज का अटूट हिस्सा रही हैं.

 

इस भाषा की मान्यता के लिए कई दशकों तक चले आंदोलन के बाद, अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में संथाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, जिसके बाद इस भाषा का तेजी से विकास हो रहा है. 

 

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