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Environmental News: झारखंड में बढ़ते हीटवेव खतरे पर मंथन, जलवायु संकट का असर

सर सोशल इम्पैक्ट एडवायजर्स और रांची प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को रांची प्रेस क्लब में “हीट वेव जागरूकता एवं प्रतिक्रिया” विषय पर मीडिया कार्यशाला एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी, हीटवेव के प्रभाव, मीडिया की भूमिका और आम लोगों के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा करना था.
 

Ranchi: असर सोशल इम्पैक्ट एडवायजर्स और रांची प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को रांची प्रेस क्लब में “हीट वेव जागरूकता एवं प्रतिक्रिया” विषय पर मीडिया कार्यशाला एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी, हीटवेव के प्रभाव, मीडिया की भूमिका और आम लोगों के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा करना था. कार्यशाला में मौसम वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, चिकित्सकों और वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया.

 

कार्यक्रम की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह द्वारा निर्मित और तेज सिसोदिया द्वारा निर्देशित लघु फिल्म ‘इट्स ओनली 47 डिग्री’ के प्रदर्शन से हुई. फिल्म में हीटवेव की भयावह स्थिति को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया.

 

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभुनाथ चौधरी ने इस मौके पर कहा कि भविष्य में भी इस तरह के जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. असर के क्लाइमेट एक्शन डायरेक्टर मुन्ना झा ने कहा कि मीडिया हीटवेव जैसे गंभीर संकट को आम जनता और नीति-निर्माताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

 

रांची मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा कि हीटवेव के कारण वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज हुई है, जिससे तूफान और वज्रपात की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है. उन्होंने बताया कि झारखंड के लिए पिछला दशक सबसे अधिक गर्म रहा है और वर्ष 2026 में ‘सुपर अल नीनो’ विकसित होने की आशंका है, जिसका असर मानसून और वैश्विक तापमान पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि जब मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है, तो उसे हीटवेव माना जाता है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब एवं मेहनतकश वर्ग पर पड़ता है.

 

रांची विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नीतीश प्रियदर्शी ने कहा, “धरती खुद को री-बैलेंस कर सकती है, लेकिन चुनौती इंसानों के अस्तित्व को बचाने की है.” उन्होंने कहा कि रांची में तेजी से बढ़ते कंक्रीट निर्माण ने शहर को ‘अर्बन हीट आइलैंड’ में बदल दिया है. उन्होंने प्राकृतिक जंगलों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि सदियों पुराने जंगलों की भरपाई संभव नहीं है.

 

वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्रा ने कहा कि हिंदी मीडिया का कवरेज क्षेत्र व्यापक है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्टिंग और स्थानीय जलवायु के अनुरूप नीति निर्माण को लेकर और गंभीर प्रयास की जरूरत है. उन्होंने पत्रकारों से जलवायु संबंधी मुद्दों पर संवेदनशील रिपोर्टिंग करने की अपील की.

 

डॉ. अत्रि गंगोपाध्याय ने स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर जोर देते हुए कहा कि भीषण गर्मी में सिर ढंककर रखना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और नियमित रूप से ओआरएस का सेवन जरूरी है. उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी शरीर में प्रोटीन की कमी पैदा कर सकती है, जो बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

 

स्वतंत्र पत्रकार राहुल सिंह ने डेटा आधारित क्लाइमेट रिपोर्टिंग की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि वर्तमान में अंग्रेजी मीडिया में क्लाइमेट रिपोर्टिंग का स्तर हिंदी मीडिया से बेहतर है, जिसे सुधारने की जरूरत है. वहीं स्वतंत्र पत्रकार विशाल जैन ने कहा कि हीटवेव की रिपोर्टिंग केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रभावित लोगों की मानवीय कहानियों को भी सामने लाना जरूरी है.

 

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