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42 साल बाद भी चांडिल बांध विस्थापितों को नहीं मिला पूरा हक, आजसू ने राज्यपाल से लगाई न्याय की गुहार

झारखंड की खबरें
  • 19,177 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और भ्रष्टाचार की जांच की मांग,
  •  चांडिल बांध प्राधिकरण के ऑडिट की भी उठाई मांग

Ranchi: चांडिल बांध परियोजना से प्रभावित हजारों विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजा को लेकर आजसू पार्टी ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरेलाल महतो ने विस्थापित परिवारों की ओर से यह ज्ञापन देते हुए आरोप लगाया कि चांडिल बांध बनने के चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार आज भी न्याय, उचित मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.

 

ज्ञापन में कहा गया है कि चांडिल बांध परियोजना के निर्माण से 116 गांव प्रभावित हुए, जिनमें 38 गांव पूरी तरह जलमग्न और 78 गांव आंशिक रूप से प्रभावित हुए इस परियोजना के कारण 19,177 परिवार विस्थापित हुए, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में परिवारों का पुनर्वास अधूरा है.

 

आजसू ने आरोप लगाया कि कई पात्र परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है, कई मामलों में भुगतान में अत्यधिक देरी हुई है, प्रभावित परिवारों के रिकॉर्ड में त्रुटियां हैं और विभाजित परिवारों को अलग इकाई मानकर लाभ नहीं दिया गया. पुनर्वास कॉलोनियों में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, आंगनबाड़ी और नालियों जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव बताया गया है.

 

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुनर्वास और अनुदान भुगतान की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, अनियमितता और बिचौलियों की भूमिका की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है

 

राज्यपाल से प्रमुख मांगें

- चांडिल बांध परियोजना के पुनर्वास और मुआवजा मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
- चांडिल बांध प्राधिकरण, जमशेदपुर के कार्यों का स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक ऑडिट कराया जाए
- सभी विस्थापित परिवारों का दोबारा सर्वे कर पात्रता सूची अपडेट की जाए
- जिन परिवारों को अब तक मुआवजा या पुनर्वास लाभ नहीं मिला है, उन्हें समयबद्ध तरीके से भुगतान किया जाए
- पुनर्वास कॉलोनियों में सभी मूलभूत नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
- युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार योजनाओं में प्राथमिकता दी जाए
- भुगतान और पुनर्वास प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए

 

इसके अलावा ज्ञापन में चांडिल अनुमंडल के डिग्री कॉलेज और सिंहभूम कॉलेज में वर्तमान शैक्षणिक सत्र से कुड़माली भाषा की पढ़ाई शुरू करने की भी मांग की गई है, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.


आजसू ने कहा कि चांडिल बांध के विस्थापितों ने राज्य और देश के विकास के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है. ऐसे में अब सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास, समयबद्ध मुआवजा और उनके वैधानिक अधिकार सुनिश्चित किए जाएं.

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