पुलिस मुख्यालय की योजना के अनुसार, इन नए ओपी और चेक पोस्टों को सीधे संबंधित थाना से जोड़ा जाएगा. यहां तैनात पुलिसकर्मी क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ आम लोगों की शिकायतों और सूचनाओं को भी तत्काल थाना तक पहुंचाएंगे. इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लंबी दूरी तय कर थाना जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
नई व्यवस्था में प्रत्येक ओपी और चेक पोस्ट का संचालन एक एएसआई के नेतृत्व में होगा. यहां करीब 20 जवानों की तैनाती की जाएगी, जिनमें जिला पुलिस बल और आईआरबी (इंडियन रिजर्व बटालियन) के जवान शामिल होंगे. इन केंद्रों की जिम्मेदारी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने, सूचना संग्रह करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने की होगी.
इसी के साथ सुरक्षा बलों की तैनाती में भी बदलाव किया जा रहा है. गढ़वा, गिरिडीह, खूंटी, लोहरदगा और सरायकेला-खरसावां जिलों के कुछ पुलिस पिकेटों से सीआरपीएफ जवानों को हटाकर उन क्षेत्रों में भेजा जाएगा, जहां सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अधिक हैं. चाईबासा, चतरा, लातेहार और बोकारो जैसे जिलों में सीआरपीएफ की अतिरिक्त तैनाती की तैयारी की गई है.
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नक्सल गतिविधियों में आई कमी के बाद अब सुरक्षा ढांचे को जनकेंद्रित बनाने की जरूरत है. ओपी और चेक पोस्ट की नई व्यवस्था न केवल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मददगार साबित होगी.
राज्य पुलिस मुख्यालय के इस फैसले को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिसिंग के नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले समय में यह व्यवस्था सुरक्षा और जनसंपर्क दोनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
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