Hazaribagh News: चौपारण प्रखंड की भगहर पंचायत में नदियों के संरक्षण को लेकर ग्रामीण अब आगे आने लगे हैं. नदी से बालू के लगातार उठाव और कथित अंधाधुंध दोहन को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है.
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ग्रामीणों का कहना है कि बालू के अनियंत्रित उठाव के कारण नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही है. नदी की चौड़ाई बढ़ने के साथ साथ लगातार कटाव होने से उसकी गहराई भी बढ़ती जा रही है. यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में इसका गंभीर असर आसपास के पर्यावरण, खेती और ग्रामीणों की जमीन पर पड़ सकता है.
ग्रामीणों का कहना है कि नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण आधार है. नदी से बालू का अनियंत्रित दोहन प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है. इसी चिंता को लेकर ग्रामीणों ने विरोध का रुख अपनाया है. उनका कहना है कि नदी से नियमानुसार बालू उठाव किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार के अवैध या अनियंत्रित खनन पर रोक लगनी चाहिए.
भगहर पंचायत बिहार की सीमा से सटा क्षेत्र होने के कारण भी अक्सर विभिन्न गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहता है. क्षेत्र में पूर्व में मंत्री, उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का आना जाना भी रहा है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार स्थानीय समस्याओं का स्थायी समाधान अब भी जरूरी है. नदियों के संरक्षण का मुद्दा भी इसी दिशा में प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनकर सामने आया है.
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित खनन विभाग से मांग की है कि नदी में बालू उठाव की स्थिति की जांच कराई जाए. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बालू का उठाव निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही हो. यदि कहीं अवैध खनन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
अब सवाल यह है कि ग्रामीणों की इस चिंता पर प्रशासन कब संज्ञान लेगा. नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने और भविष्य में बड़े नुकसान की आशंका को रोकने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है. ग्रामीणों का विरोध इसी मांग की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहा है.
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