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Exclusive: झारखंड में पुलिस ही असुरक्षित! 2 साल में 35 से अधिक घटनाएं, पढ़ें ये क्राइम स्टोरी

Ranchi :  झारखंड में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, आज वही कंधे खुद असुरक्षित नजर आ रहे हैं. बीते दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य के अलग-अलग जिलों में पुलिस अधिकारियों और जवानों के साथ मारपीट की 35 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं. इन घटनाओं में 66 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि 40 से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की गई हैं.

 

ग्रामीण इलाकों में ज्यादा मामले


सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में ऐसी घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई हैं. अवैध खनन, शराब तस्करी, भूमि विवाद और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस को विरोध का सामना करना पड़ा. कई बार भीड़ उग्र होकर कानून को हाथ में ले लेती है.

 

हाई-प्रोफाइल नाम भी आए सामने


इन मामलों में कुछ घटनाएं ऐसी भी रहीं, जहां पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी और एक अधिवक्ता (वकील) पर भी पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप लगे. संबंधित मामलों में जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. हालांकि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय में विचाराधीन है.

 

सवालों के घेरे में सुरक्षा


लगातार हो रही इन घटनाओं ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस संघों का कहना है कि जवानों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, बैकअप और कानूनी संरक्षण की आवश्यकता है. वहीं वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रणनीति बनाई जा रही है.

 

पुलिस मुख्यालय है सख्त


लगातार बढ़ रही घटनाओं से पुलिस में असंतोष भी देखा जा रहा है. जवानों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान पर्याप्त सुरक्षा, अतिरिक्त बल और आधुनिक उपकरणों की जरूरत है. पुलिस संघों ने ऐसे मामलों में सख्त कानून और त्वरित कार्रवाई की मांग उठाई है.

 

इधर पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि पुलिस पर हमला किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है. साथ ही संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की तैनाती और निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई गई है.

 

अब सवाल है कि कानून की रक्षा करने वाले ही अगर असुरक्षित महसूस करें, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है. अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले समय में इन घटनाओं पर किस तरह प्रभावी अंकुश लगाया जाता है.जानिए, पिछले दो वर्षों में पुलिसकर्मियों के साथ कितनी मारपीट की घटनाएं हुईं और कितनों पर हुई कार्रवाई

 

केस स्टडी 1

 

रांची में 27 फरवरी 2026 को पुलिस मेंस एसोसिएशन का आरोप है कि डोरंडा थाना प्रभारी दीपिका प्रसाद के साथ झारखंड हाईकोर्ट परिसर में वकीलों ने घेरकर अभद्रता और दुर्व्यवहार किया, इस घटना के विरोध में एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जिले के सभी पुलिसकर्मी अगले तीन दिनों तक काला बिल्ला लगाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे.

केस स्टडी 2

 

बोकारो में 27 फरवरी 2026 को नगर निकाय चुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया की निगरानी कर रहे चास के एसडीपीओ के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना हुई थी. जानकारी के अनुसार, एक बूथ पर मतदान को लेकर विवाद और हंगामे की सूचना पर पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे थे. इसी दौरान कुछ लोगों ने आक्रोशित होकर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और हाथापाई की. जिसमें चास एसडीपीओ गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

 


केस स्टडी 3


जमशेदपुर में 9 जनवरी 2026 को वाहन जांच अभियान के दौरान कुछ युवकों ने पुलिसकर्मियों से अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की, बाद में पुलिस ने मामले की जांच करते हुए कई लोगों पर एफआईआर दर्ज की.

 

केस स्टडी 4

लातेहार में 2 सितंबर 2025 को पुलिस जवानों ने आरोप लगाया था कि झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने अपने अंगरक्षकों के साथ मारपीट की थी. मारपीट के बाद संगठन के हस्तक्षेप के बाद‌ मेदिनीनगर थाना में पूर्व मंत्री पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी.

 


केस स्टडी 5


रांची में 12 जून 2024 को ट्रैफिक चेकिंग के दौरान नियम तोड़ने वाले कुछ युवकों ने पुलिस जवान के साथ धक्का-मुक्की की. मामला बढ़ने पर हाथापाई हुई. सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट की धाराओं में केस दर्ज, आरोपियों की गिरफ्तारी.

 


केस स्टडी 6

हजारीबाग में 27 जुलाई 2025 को रात्रि गश्ती के दौरान नशे में धुत युवकों ने पुलिस वाहन रोककर जवानों से हाथापाई की और मौके पर गिरफ्तारी भी हुई.


केस स्टडी 7


पलामू में 18 जनवरी 2025 को आपसी विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा. इस दौरान ग्रामीणों ने जवानों के साथ मारपीट भी की. बाद में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई.

 

केस स्टडी 8

धनबाद में 3 सितंबर 2024 को अवैध कारोबार की सूचना पर छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम पर पथराव और हमला हुआ. जिसमें एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया था, बाद में कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई.

 

केस स्टडी 9

लोहरदगा में 5 अप्रैल 2024 को भूमि विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम से कुछ लोगों ने बहस के बाद धक्का-मुक्की की. एक जवान को हल्की चोट आई. जिसमें सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था.

 


केस स्टडी 10

गुमला में 16 जून 2025 को ग्रामीण विवाद सुलझाने गई पुलिस टीम को आक्रोशित लोगों ने घेर लिया और हाथापाई की, बाद में कई आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी प्रक्रिया शुरू की गयी थी.


केस स्टडी 11

 

गिरिडीह में 14 अगस्त 2024 को अवैध खनन की सूचना पर जांच करने पहुंची पुलिस टीम का स्थानीय लोगों ने विरोध किया. बहस बढ़ने पर धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई, एक जवान को चोट लगी, बाद में सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था.

 

केस स्टडी 12


रामगढ़ में 11 मार्च 2025 को रामगढ़ जिले के भदानीनगर क्षेत्र में अवैध गतिविधि की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम का कुछ लोगों ने विरोध किया. कार्रवाई के दौरान बहस बढ़ी और जवानों के साथ धक्का-मुक्की व मारपीट की गई. एक सिपाही को हल्की चोट आई. बाद में सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई. मामले में नामजद आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की गई.

 

 

 

 

 

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