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Exclusive: झारखंड में मुर्दों और वैसे लोग भी सामाजिक सहायता पेंशन ले रहे हैं जो इसके हकदार नहीं

Exclusive news lagatar
  • राज्य सरकार ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत पेंशन लेने वालों के ऑडिट करायी.

Ranchi: झारखंड में मुर्दे और अयोग्य लोग भी सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत मिलने वाले पेंशन का लाभ उठा रहे है. 100 लाभुकों में से 12 लाभुक मरने के बाद भी 1000 रुपये प्रति माह पेंशन लेते हुए पाये गये हैं. सिर्फ इतना ही नहीं 100 में से 32 लोग ऐसे हैं जिन्हें कोई लाभ नहीं मिलना चाहिए था, फिर भी वे पेंशन का लाभ ले रहे हैं. 

 

NSA के दायरे में शामिल 12.08 लाख लाभुकों में से सिर्फ 5192 लाभुकों के ऑडिट के दौरान इस जालसाजी की पुष्टि हुई है. इससे 12.08 लाख लोगों में से अयोग्य और पेंशन लेने वाले मुर्दों की संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

 

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत पेंशन योजनाएं

  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन (IGNOAPAS)- 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग को मिलताहै.
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS)- 40 साल से 79 साल तक की महिलाओँ के लिए.
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय नि:शक्त पेंशन योजना (IGNDPS)- 18-79 साल के दिव्यांगों के लिए.
  • राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (NFBS)- परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद एकमुश्त 20 हज़ार रुपया.

 

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत पेंशन लेने वालों के ऑडिट का आदेश दिया था. इसके आलोक में NSAP के दायरे में शामिल 12.08 लोगों को सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का आकलन करना था. ऑडिट का उद्देश्य योजना से होने वाले लाभ और लाभुकों की स्थिति का पता लगाया जाना था. साथ ही इस बात का भी आकलन किया जाना था कि जनता के टैक्स से मिले पैसों को सदुपयोग हो रहा है या नहीं. सरकार के आदेश के आलोक में राज्य के सभी 24 जिलों के 12.08 लाख लाभुकों का ऑडिट किया जाना है.

 

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हालांकि सरकार के आदेश के आलोक में नमूना के तौर पर राज्य के 11 जिलों के 21 ग्राम पंचायतों के 5192 लाभुकों के ऑडिट में ही बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के मामले पकड़ में आये हैं. नमूना ऑडिट के दौरान जिन 11 जिलों को चुना गया. इसमें राजधानी रांची सहित धनबाद,चतरा, गढ़वा, दुमका, गिरिडीग,गोड्डा, लातेहार, सरायकेला, साहिबगंज और सिमडेगा का नाम शामिल है. 

 

 

ऑडिट में मिले तथ्य आंकड़ों की नजर में

ऑडिट के लिए प्रस्तावित लाभुक  5192
ऑडिट के सामने हाजिर लाभुक  60.71% (3152)
मृत के रूप में चिह्नत लाभुक  12.07% (445)
 3152 में अयोग्य लाभुक  17.52% (646)
कुल आडिटेड लाभुक 71.51% (3687)
कुल अनुपस्थित लाभुक  28.49% (1505)
3687 में अयोग्य लाभु  32.03% (1181)

 

ऑडिट के दौरान अयोग्य लाभुको का श्रेणी में आठ तरह के लाभुकों को शामिल किया गया.(1)- जो जिंदा नहीं है लेकिन पेंशन ले रहा है. (2)-पेंशन पाने वाला लापता है. (3)- जो विधवा नहीं है. (4)- जो विकलांग नहीं है लेकिन पेंशन ले रहा है. (5)- जिसे पहले से कोई पेंशन मिल रहा है. (6)- निर्धारित उम्र सीमा को पूरा नहीं करता है. (7)- जो BPL नहीं है. (8)- जिसकी आमदनी ज्यादा है.

 

सरकार के आदेश के आलोक में नमूना के तौर पर 5192 लाभुकों को ऑडिट के लिए चुना गया. इसमें से सिर्फ 3152 लाभुक ही ऑडिट टीम के सामने उपस्थित हुए. संबंधित जिलों द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़ों में से 445 लाभुकों को मुर्दों के रूप में चिह्नित किया गया. लेकिन इनके लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान किया जा रहा है. 

 

ऑडिट में 646 लाभुक ऐसे पाये गये जो इस कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिए निर्धारित उम्र सीमा आदि को पूरा नहीं करते थे. इसके अलावा 90 लाभुक लापता पाये गये. यानी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के लिए अयोग्य मानने के लिए निर्धारित आठ मापदंडों को पूरा करने वाले लाभुकों की संख्या 1181 है. जो आडिटेड लाभुकों की संख्या का 32.03 प्रतिशत है.

 

 

 

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