- 20 से अधिक फर्जी नामांकन की जांच
- सड़ी दवाइयां मिलीं
- करोड़ों के टेंडर में भी गड़बड़ी के आरोप
Ranchi : रिम्स में सीआईडी (CID) की छापेमारी के 26 दिन बीत चुके हैं. लेकिन अब तक किसी भी मामले में FIR दर्ज नहीं हुई है. जांच एजेंसी अभी दस्तावेजों और साक्ष्यों को खंगालने में जुटी है. इस बीच जांच में फर्जी नामांकन से लेकर दवा, उपकरण खरीद और करोड़ों रुपये के टेंडर में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं.
राज्य सरकार को रिम्स में टेंडर प्रक्रिया और MBBS नामांकन में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी. इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की जांच का आदेश दिया. CID ने जांच शुरू की तो कई स्तर पर अनियमितताओं के संकेत मिले.
20 से अधिक नामांकन जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, पिछले सत्र में रिम्स में हुए MBBS और BDS नामांकन में 20 से अधिक मामलों की जांच की जा रही है. इनमें फर्जी जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने की शिकायत है. CID ने चार छात्रों के संबंध में रिम्स प्रबंधन से विस्तृत जानकारी मांगी है.
जांच के दौरान छात्रों के प्रमाण पत्रों की छायाप्रति (फोटो कॉपी) लेकर उन्हें संबंधित जिलों में सत्यापन के लिए भेजा गया है. अब CID को जिलों से रिपोर्ट का इंतजार है. प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर संबंधित छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज होगी.
साथ ही यह भी जांच होगी कि प्रमाण पत्र किस स्तर पर तैयार किए गए और इसमें किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं. दो छात्रों का नामांकन पहले ही रद्द किया जा चुका है.
सड़ी दवाओं से लेकर करोड़ों के टेंडर तक जांच
CID की जांच में रिम्स के स्टॉक में सड़ी हुई दवाइयां भी मिली हैं. दवा और उपकरण खरीद से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ टेंडर से संबंधित कागजात भी CID ने जब्त किए हैं. सैनिटेशन, हाउसकीपिंग और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े टेंडर की भी जांच हो रही है.
मुख्य अस्पताल भवन, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, हॉस्टल और ट्रॉमा सेंटर से जुड़े इस टेंडर में आरोप है कि तकनीकी और वित्तीय मानकों पर अयोग्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश की तीन कंपनियों को पात्र घोषित कर दिया गया. यह टेंडर तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार के कार्यकाल में हुआ था. CID अब उनसे भी पूछताछ करेगी.
26 दिन बाद भी FIR नहीं
रिम्स में CID की छापेमारी के 26 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई है. फिलहाल CID नामांकन, प्रमाण पत्र, दवा खरीद और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. जांच पूरी होने के बाद ही FIR और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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