Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Exclusive : झारखंड में फिर खुली रेलवे भर्ती घोटाले की फाइल, बड़े नेटवर्क की जांच तेज

झारखंड सहित कई राज्यों में रेलवे में फर्जी बहाली के जरिए नौकरी करने का मामला सामने आया है. इस बात का खुलासा रेलवे पुलिस की जांच में हुआ है. खुलासा होने के बाद रेलवे पुलिस और झारखंड रेलवे पुलिस ने उन कर्मचारियों की पहचान के लिए व्यापक स्तर पर जांच अभियान शुरू कर दिया है, जो फर्जी नियुक्ति पत्रों के आधार पर वर्षों से रेलवे में कार्यरत हैं.
Advertisement
Advertisement

Ranchi :  झारखंड में एक बार फिर रेलवे में फर्जी तरीके से हुई भर्ती की फाइल खुली है. सूत्रों के अनुसार, झारखंड रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत रेलवे कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है.

 

इस जांच अभियान के जरिये यह पता लगाया जा रहा है कि कौन कर्मचारी वैध तरीके से नियुक्त हुआ है और कौन फर्जी बहाली के जरिए नौकरी कर रहा है.  रेलवे पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस गिरोह के मास्टरमाइंड और एजेंटों तक पहुंचने में सफलता मिल सकती है.

 

फिलहाल पुलिस नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय एजेंटों, बिचौलियों और पूरे नेटवर्क की पहचान में जुटी हुई है.  अधिकारियों के अनुसार, साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच के आधार पर आगे बड़ी कार्रवाई की संभावना है. यदि यह नेटवर्क व्यापक स्तर पर सक्रिय पाया जाता है तो देशभर के कई रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत कर्मचारियों की नियुक्तियों की दोबारा जांच की जा सकती है. 

 

गौरतलब है कि रेलवे पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि झारखंड सहित अन्य राज्यों में रेलवे में फर्जी बहाली के जरिए कई लोग नौकरी कर रहे हैं. खुलासा होने के बाद रेलवे पुलिस और झारखंड रेलवे पुलिस ने उन कर्मचारियों की पहचान के लिए व्यापक स्तर पर जांच अभियान शुरू कर दिया है, जो फर्जी नियुक्ति पत्रों के आधार पर वर्षों से रेलवे में कार्यरत हैं. 

 

दरअसल, कुछ वर्ष पूर्व चक्रधरपुर मंडल के वीरमास रेलवे स्टेशन पर टिकट क्लर्क के रूप में कार्यरत तीन लोगों को रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रूपम शाह, शुभाशीष मंडल और देविन कुमार के रूप में हुई थी. 

 

जांच में खुलासा हुआ था कि तीनों फर्जी बहाली के जरिए रेलवे में नौकरी कर रहे थे और लंबे समय से टिकट बिक्री का कार्य कर रहे थे.  गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई में रेलवे पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी पहचान पत्र (आईडी कार्ड), फर्जी नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) समेत कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए थे.

 

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया था कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे 21 लाख रुपये से अधिक राशि ली गई थी. जांच में यह भी सामने आया था कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ें उत्तर प्रदेश तक फैली हुई है और कई राज्यों में इसी तरह लोगों को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगकर फर्जी तरीके से नियुक्त कराया गया है. 

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही