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अस्पतालों के लंबित दावों व पंजीकरण में देरी पर कार्यकारी निदेशक सख्त

Ranchi : नामकुम स्थित सभागार में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की कार्यकारी निदेशक डॉ नेहा अरोड़ा की अध्यक्षता में आयुष्मान भारत - मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में राज्य के सभी जिला कार्यक्रम समन्वयक मौजूद रहे.

 

बैठक में अस्पतालों के एम्पैनलमेंट, ई-केवाईसी की स्थिति, सरकारी अस्पतालों के क्लेम स्टेटस, लंबित दावे, जिला अस्पतालों की विशेषज्ञता, पॉलिसी 8 के तहत अस्पतालों की हॉस्पिटलाइजेशन और क्लेम की स्थिति, सरकारी व निजी अस्पतालों के क्लेम वितरण जैसे बिंदुओं पर चर्चा की गई.

 

डॉ अरोड़ा ने निर्देश दिया कि सभी जिले मरीजों को बेहतर इलाज और देखभाल सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा कि योजना के तहत अधिक से अधिक केस बुक किए जाएं ताकि मरीजों को निःशुल्क इलाज की सुविधा मिल सके और अस्पतालों को समय पर भुगतान प्राप्त हो.

 

उन्होंने जिलों को मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने को कहा, ताकि स्थानीय समस्याओं की पहचान और समाधान समय पर किया जा सके. साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जिन जिलों में डीपीसी की नियुक्ति लंबित है वहां शीघ्र नियुक्ति की जाए.

 

डॉ अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि यदि किसी जिले में योजना से संबंधित कोई समस्या आती है तो उसे तत्काल राज्य स्तर पर सूचित किया जाए. उन्होंने यह भी पूछा कि कुछ जिलों में अब तक कुछ अस्पतालों का पंजीकरण क्यों नहीं हो पाया है और इसकी विस्तृत जानकारी मांगी.

 

बैठक में जिलों की विशेष समस्याओं पर भी चर्चा हुई और कई मुद्दों का तत्काल समाधान किया गया. अंत में निर्देश दिया गया कि सभी सदर अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति रांची सदर अस्पताल की तर्ज पर की जाए ताकि मरीजों को संपूर्ण लाभ मिल सके.

 

बैठक में जसास के महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा, डिलोइट और नेशनल इंश्योरेंस के अधिकारी, जसास के अन्य अधिकारी तथा फायर सेफ्टी और प्रदूषण नियंत्रण के नोडल पदाधिकारी भी उपस्थित रहे. 

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