- डोरंडा कॉलेज की सहायक लाइब्रेरियन और कंप्यूटर ऑपरेटर होंगी नियमित
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा कॉलेज में 10 साल से अधिक समय से संविदा पर कार्यरत दो महिला कर्मचारियों को राहत दी है. अदालत ने रांची विश्वविद्यालय और डोरंडा कॉलेज प्रबंधन को एक याचिकाकर्ता को सहायक लाइब्रेरियन और दूसरी को कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियमित करने का निर्देश दिया है. इसके लिए छह सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की गई है.
साथ ही, पहली याचिकाकर्ता को जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक का बकाया पारिश्रमिक भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने प्रियांका कुमारी और अनुराधा कुमारी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है.
अदालत ने कहा कि जब कर्मचारी लंबे समय से संस्थान के नियमित और आवश्यक कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं, तो उन्हें केवल संविदा कर्मचारी बताकर उनके साथ अन्याय नहीं किया जा सकता है.
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दोनों कर्मी कॉलेज में वर्षों से कर रही हैं काम
याचिका के अनुसार, प्रियांका कुमारी ने दो जुलाई 2015 को डोरंडा कॉलेज में ग्रेड-III कर्मचारी के रूप में नियुक्ति के बाद आठ जुलाई 2015 को योगदान दिया था. बाद में उन्हें सहायक लाइब्रेरियन के रूप में कार्य करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने दो फरवरी 2018 को इस पद पर योगदान दिया.
प्रियांका ने इतिहास विषय में स्नातक के साथ कंप्यूटर एप्लीकेशन, कंप्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग में एडवांस डिप्लोमा किया है. इसके अलावा, उन्होंने सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस में पीएचडी भी की है.
वहीं, अनुराधा कुमारी की नियुक्ति 26 मार्च 2013 को हुई थी और उन्होंने दो अप्रैल 2013 को योगदान दिया था. बाद में उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्य करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने एक जुलाई 2015 को इस पद पर योगदान दिया. दोनों कर्मचारी लंबे समय से कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रही हैं.
नियमितीकरण के लिए विश्वविद्यालय को भेजी गई थी सूची
अदालत को बताया गया कि रांची विश्वविद्यालय ने वर्ष 2020 में अपने अधीनस्थ कॉलेजों से नियमितीकरण और सेवा समायोजन के लिए संविदा कर्मचारियों की सूची मांगी थी. इसके बाद डोरंडा कॉलेज ने 26 नवंबर 2020 को विश्वविद्यालय को सूची भेजी थी, जिसमें प्रियांका का नाम क्रम संख्या 34 और अनुराधा का नाम क्रम संख्या छह पर दर्ज था.
इसके बाद जनवरी 2021 में दोबारा मांगी गई जानकारी के जवाब में कॉलेज ने 21 जनवरी 2021 को विश्वविद्यालय को पत्र भेजा. इसमें प्रियांका का नाम क्रम संख्या 19 और अनुराधा का नाम क्रम संख्या 17 पर दर्ज था. इस पत्र में दोनों की नियुक्ति और योगदान से संबंधित विवरण भी शामिल थे.
अदालत ने पाया कि रांची विश्वविद्यालय ने वर्ष 2021 में ग्रेड-IV कर्मचारियों को 21 सितंबर 2021 के ज्ञापन संख्या Esstt/C/588/21 और ग्रेड-III कर्मचारियों को उसी दिन जारी ज्ञापन संख्या Esstt/C/587/21 के माध्यम से नियमित किया था. हालांकि, याचिकाकर्ताओं को इसका लाभ नहीं दिया गया.
नियुक्ति पत्र को फर्जी बताने पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य ने प्रियांका की दो जुलाई 2015 की नियुक्ति से संबंधित पत्र को फर्जी बताते हुए कहा कि कॉलेज के रिकॉर्ड में ऐसा कोई पत्र उपलब्ध नहीं है. इस पर अदालत ने प्राचार्य को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया.
प्राचार्य ने अदालत को बताया कि संबंधित पत्र कार्यालय में नहीं मिल पाने के कारण जवाबी हलफनामे में ऐसा उल्लेख किया गया था. हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे में कॉलेज द्वारा भेजा गया 21 जनवरी 2021 का पत्र संलग्न था. इसमें दोनों याचिकाकर्ताओं के नाम और उनके योगदान की तिथियां दर्ज थीं.
अदालत ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों के संबंध में बिना रिकॉर्ड की उचित जांच किए बयान देना गंभीर विषय है. अदालत ने प्राचार्य के इस रवैये की कड़ी आलोचना की और भविष्य में सावधानी बरतने की अपेक्षा की.
स्थायी प्रकृति के कार्यों के लिए कर्मियों को संविदा पर रखना शोषण
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लाइब्रेरियन और कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य कॉलेज के दैनिक संचालन के लिए स्थायी और अनिवार्य प्रकृति का है. दोनों याचिकाकर्ताओं की सेवा अवधि लंबी रही है और उनके विरुद्ध किसी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी या चेतावनी का उल्लेख नहीं है.
अदालत ने कहा कि 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले कॉलेज में पुस्तकालय का होना आवश्यक है और पुस्तकालय बिना लाइब्रेरियन के नहीं चल सकता. इसी तरह, वर्तमान समय में कॉलेज के कार्यालयी कार्य और रिकॉर्ड कंप्यूटर के माध्यम से संचालित होते हैं. ऐसे में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद की आवश्यकता से इनकार करना तर्कसंगत नहीं है.
अदालत ने यह भी कहा कि रांची विश्वविद्यालय ने समान परिस्थितियों वाले ग्रेड-III और ग्रेड-IV कर्मचारियों को नियमित किया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं को इससे वंचित रखना उनके साथ भेदभाव है.
छह सप्ताह में नियमितीकरण, बकाया भुगतान का भी निर्देश
सभी तथ्यों, दस्तावेजों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि दोनों याचिकाकर्ताओं को लंबे समय तक संविदा पर रखकर उनके साथ अन्याय किया गया है.
अदालत ने रांची विश्वविद्यालय, उसके कुलपति, कुलसचिव और डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य को निर्देश दिया कि प्रियांका कुमारी को सहायक लाइब्रेरियन और अनुराधा कुमारी को कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर छह सप्ताह के भीतर नियमित किया जाए.
दोनों को इसके अनुरूप सभी परिणामी लाभ भी दिए जाएं. इसके साथ ही, प्रियांका कुमारी को जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक का बकाया पारिश्रमिक, यदि इस अवधि में कोई भुगतान किया गया हो तो उसका समायोजन करने के बाद चार सप्ताह के भीतर जारी करने का आदेश दिया गया.

