- - जमीन अधिग्रहण और वन विभाग की मंजूरी बना सबसे बड़ा रोड़ा
Ranchi: भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम झारखंड में उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पा रहा है. जमीन अधिग्रहण और वन भूमि की मंजूरी में देरी के कारण परियोजना के अधिकांश हिस्सों में निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका है. राज्य में इस एक्सप्रेस-वे का करीब 202 किलोमीटर हिस्सा बनना है, जिसे छह पैकेज में बांटा गया है. लेकिन अब तक केवल एक पैकेज में ही निर्माण एजेंसियां काम शुरू कर पायी हैं.
करीब 610 किलोमीटर लंबे इस सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे को उत्तर प्रदेश के चंदौली से पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा तक तैयार किया जाना है. झारखंड में यह सड़क चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची और बोकारो जिले से होकर गुजरेगी. एनएचएआई की योजना के अनुसार राज्य में पैकेज संख्या 8 से 13 तक निर्माण होना है.
जानकारी के मुताबिक, चतरा में पैकेज-8, हजारीबाग में पैकेज-9, रामगढ़ में पैकेज-10, रांची में पैकेज-11 और बोकारो में पैकेज-12 व 13 प्रस्तावित हैं. इनमें सिर्फ बोकारो के अंतिम हिस्से में निर्माण कार्य जमीन पर उतर पाया है. यहां फिलहाल मिट्टी भराई और बेस तैयार करने का काम जारी है. बाकी पांच पैकेज में अब तक निर्माण एजेंसियां पूरी तरह काम शुरू नहीं कर सकी हैं.
सबसे अधिक दिक्कत हजारीबाग और रामगढ़ क्षेत्र में सामने आ रही है, जहां सड़क का हिस्सा वन भूमि से गुजर रहा है. वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी की प्रक्रिया लंबी होने के कारण काम अटका हुआ है. वहीं चतरा और रांची इलाके में रैयती जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया धीमी चल रही है.
जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए वर्ष 2023 में ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गयी थी और संबंधित कंपनियों को वर्कऑर्डर भी जारी कर दिए गए थे. इसके बावजूद तीन साल बाद भी कई हिस्सों में जमीन उपलब्ध नहीं हो पायी है. हालात ऐसे हैं कि अधिकांश पैकेज में अब तक मशीनें भी नहीं पहुंच सकी हैं.
बताया जा रहा है कि एनएचएआई की ओर से राज्य सरकार और संबंधित जिलों को कई बार पत्र भेजकर जमीन अधिग्रहण और क्लियरेंस प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही जमीन उपलब्ध होगी, बाकी सेक्शन में भी तेजी से निर्माण शुरू करा दिया जाएगा.
यह एक्सप्रेस-वे तैयार होने के बाद झारखंड के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. माल ढुलाई आसान होगी और रांची, रामगढ़ तथा बोकारो जैसे इलाकों की सीधी कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से मजबूत होगी. हालांकि फिलहाल पांच पैकेज में काम अटका रहने से परियोजना की समयसीमा पर असर पड़ता दिख रहा है. एनएचएआई ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.
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