Ranchi : प्रकृति पर्व सरहुल 20 मार्च से शुरू हो रहा है. आदिवासी समाज में पर्व को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है. सरना स्थलों पर शाम में पूजा पाठ होगी. पाहन की अगुवाई में कोटवार पईनभोरा कुआं नदी तालाब से जल मिट्टी से बना घड़ा में पानी भरेंगे.
वहीं हातमा सरना स्थल में जगलाल पाहन शाम 7.30 बजे विशेष पूजा करेंगे. इस दिन हातमा तालाब से पाहन के सहयोगी घड़ा में पानी भरेंगे. इसके बाद से हातमा स्थित आसपास के हॉस्टल, मुहल्ले में स्थापित सरना स्थलो में खोड़हा मंडली नाचते गाते पानी लेकर जायेंगे और सरना स्थलो पर रखेंगे. दूसरी ओर सिरमटोली सरना स्थल पर रोहित हंस विधिवत तरीके से पूजा पाठ करेंगे.
पांच मुर्गों की बलि अर्पित की जाएगी. जिसमें लाल, सफेद, माला, गोली और काली मुर्गी शामिल है. इसके साथ ही ग्राम देवता, सूर्य भगवान, जल देवता, खेत खलिहाल हरा भरा रहे इसके लिए विनती की जाएगी. 21 मार्च को सुबह बारिश होने की संभावना की जायेगी.
दोपहर बाद भव्य सरहुल जुलुस निकाली जायेगी. कचहरी मेनरोड होते हुए सिरमटोली सरना स्थल पहुंचेंगे वहां सरना स्थल का परिक्रमा करेंगे औj मां सरना से विनती करेंगे. वहीं रांची विश्वविदयालय के जनजातीय विभागों, वीमेंश कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, रामलखन सिंह यादव कॉलेजों समेत अन्य कॉलेजों में सरहुल पर्व को लेकर विद्यार्थियों में काफी उत्साह है.
इसमें सभी जनजातीय भाषा मुंडारी, कुडुख, संथाली, हो और खड़िया भाषा के विद्यार्थी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे. वही क्षेत्रिय भाषाओं में नागपुरी, खोरठा, कुरमाली और पंचपरगनिया के विद्यार्थियों भी अपनी अपनी भाषा में गीत संगीत करते हुए सिरमटोली पहुंचेंगे.
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