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संत मरिया महागिरजाघर में याद किए जायेंगे फादर कॉन्सटेंट लिवंस

Ranchi: रोमन कैथोलिक चर्च के मसीहा माने जाने वाले ईश सेवक फादर कॉन्सटेंट लिवंस की 132वीं पुण्यतिथि 9 नवंबर को संत मरियम महागिरजाघर में मनाई जाएगी. मुख्य अनुष्ठदाता आर्चबिशप विसेंट आईंद होंगे. मिस्सा के साथ फादर कॉन्सेंट लिवंस को स्मरण किया जाएगा. इस अवसर पर विशेष प्रार्थना सभा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसको लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है.

 

फादर कॉन्सेटेंट लिवंस 18 मार्च को पहली बार पहुंचे थे रांची

फादर कोंसटेंट लिवंस को झारखंड में आदिवासी अधिकारों के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है. वे 18 मार्च 1885 को पहली बार रांची आए थे. अगले ही दिन 19 मार्च को जमगई (हुलहुंडू पारिश) पहुंचे, जहां उन्होंने आदिवासी समाज के बीच रहे. उनकी भाषा, संस्कृति और जीवनशैली को गहराई से समझा. उन्होंने मुंडारी भाषा सीखी. इसी भाषा में लोगों के साथ संवाद किया और उनके दुख-दर्द को जाना.

 

फादर लिवंस ने तोरपा, दिघिया, मांडर, लोहरदगा, हीराबारवे और चैनपुर जैसे ग्रामीण इलाकों का भ्रमण किया. आदिवासी समाज की वास्तविक समस्याओं का अध्ययन किया. उन्होंने देखा कि अज्ञानता, अंधविश्वास और जमींदारी शोषण के कारण आदिवासी समाज कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन व्यतित कर रहे थे.

 

उन्होंने समाज सुधार की दिशा में कार्य किए. उन्होंने अंधविश्वास दूर करने महत्वपूर्ण काम किए. इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र के साथ आत्मसम्मान जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.


कानूनी लड़ाई लड़कर आदिवासी परिवारों को दिलाया था हक

फादर लिवंस ने केवल आध्यात्मिक क्षेत्र में  कार्य किया. सामाजिक न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए. जब उन्होंने देखा कि जमींदार और साहूकारों द्वारा आदिवासियों की जमीनें लूटी जा रही थी, तब उन्होंने रांची कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी. कई आदिवासी परिवारों को उनकी जमीन वापस दिलाई. यही कारण है कि उन्हें आदिवासियों के अधिकारों के रक्षक’ के रूप में याद किया जाता है.

 

पुण्यतिथि का मुख्य अनुष्ठदाता आर्चबिशप विसेंट आईद होंगे

उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा लेकर रोमन कैथोलिक चर्च शिक्षा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. उनकी स्मृति में कई कार्यक्रम होंगे. पुण्यतिथि कार्यक्रम में पल्ली पुरोहित आनंद डेविड खलखो, फादर जॉर्ज मिंज,फादर प्रफुल टोप्पो,फादर निलम तिड़ु,फादर देनिश खेस,फादर रोशन टोप्पो समेत समाजसेवी उनके योगदान को याद करेंगे.

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